गर्मी के मौसम में कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन बीमारियों का संबंध बढ़ते तापमान के साथ-साथ खाने पीने की आदतों से भी है। दो दिन से बढ़े तापमान के कारण अस्पताल में भी मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है।
होली के बाद तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दिन और रात का पारा बढ़ रहा है। बढ़ते तापमान के कारण कई बीमारियां भी पनपने लगती हैं। इसका असर अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों की संख्या से लगाया जा सकता है। अस्पताल के प्रत्येक वार्ड में मरीजों का आंकड़ा रोजाना 100 के पार पहुंच रहा है। गर्मी में डिहाइड्रेशन, उल्टी एवं दस्त आदि के अलावा जुकाम और एलर्जी के मरीज बढ़ने लगे हैं। गर्मी के मौसम में बच्चों में अधिक परेशानी होती है। खान-पान में चूक गर्मी के मौसम में भारी पड़ सकती है।
बुखार, उल्टी-दस्त, नेत्र रोग के साथ चर्म रोग से पीड़ित लोगों ने भी अस्पताल का रूख कर लिया है। अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सकों के नियमित बैठने के निर्देश दिए गए हैं। सुबह से दोपहर तक पहले ओपीडी में मरीजों को देखा जाएगा। सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि गर्मी के मौसम बढ़ने के साथ अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। इसके लिए दवाइयों के स्टॉक की जानकारी ली गई है। जो दवाई मौजूद नहीं हैं, उसका डिमांड पत्र शासन को भेजा गया है। साथ ही चिकित्सकों को भी अलर्ट कर दिया गया है।
जेस्टेशनल डायबिटीज की जांच जरूरी
खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए गरमी अधिक नुकसानदायक है। शरीर में पानी की कमी से थकान और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में बाधा हो सकती है। वहीं, जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावस्था का मधुमेह) इसकी जांच जरूरी है। गर्भवती महिलाओं में यह जांच 24-28 हफ्तों के बीच होती है। इसका नियमित ख्याल रखा जाना जरूरी है।
नोटिस चस्पा, नहीं है एंटी रैबीज
सरकारी अस्पताल में कुत्ता काटे के इंजेक्शनों की किल्लत बनी हुई है। शासन से इंजेक्शनों की पूर्ति नहीं हो रही है, जबकि रोजाना दर्जनों मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसको लेकर अस्पताल प्रशासन ने नोटिस चस्पा किए हैं।