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दीपावली पर्व अंधेरे में मनाने को मजबूर शिक्षक

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शिक्षकों को सात महीने से नहीं मिला मानदेय
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मुजफ्फरनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बावजूद व्यावसायिक शिक्षकों को अभी तक मानदेय नहीं मिला है। परेशान शिक्षक के परिवार रोशनी का पर्व दीपावली अंधेरे में मनाने को मजबूर हैं। बुधवार को शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने डीएम से मिल कर अपनी गुुहार लगाई, मगर उन्होंने बजट नहीं होने की बात कह निराश कर दिया गया।
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जिले के राजकीय और माध्यमिक कॉलेजों में कंप्यूटर, टंकन आदि विषय पढ़ाने के लिए शासन की ओर से बीते तीन दशक से व्यावसायिक शिक्षकों की नियुक्ति है। वर्तमान में जनपद के कॉलेजों में फिलहान 40 शिक्षक और शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। इन शिक्षकों को वर्तमान में प्रति दिन पांच सौ रुपये के हिसाब से 15000 हजार रुपये प्रति माह का मानदेय मिलता है। यह मानदेय भी बीते सात माह से नहीं मिला है। ऐसे में शिक्षक और उनके परिजन परेशान है कि दीपावली पर्व कैसे मनाएं। शासन के आदेश हुए हैं कि सभी कर्मचारियों का वेतन और मानदेय 25 अक्तूबर तक मिल जाना चाहिए, ताकि वो दीपावली पर्व मना सके। बुधवार को व्यावसायिक शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट पहुंच कर डीएम सेल्वा कुमार जे को अपनी पीड़ा बताई और सीएम के नाम ज्ञापन देकर मानेदय दिलवाने की मांग की, ताकि परिवार दीपावली मना सके। डीएम ने डीआईओएस से इस संबंध में जानकारी की, तो पता चला कि उनके मानदेय के लिए अभी बजट नहीं आया है। डीएम ने शिक्षकों को डीआईओएस गजेंद्र कुमार के पास भेज दिया। डीआईओएस ने भी बजट न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड लिया और सिर्फ आश्वासन दिया कि दीपावली के बाद बजट मंगवाया जाएगा। ज्ञापन देने वाले शिक्षकों में आक्रोश है। उनका कहना है कि शासन, प्रशासन ने उनके साथ छल किया है। मानदेय नहीं मिलने के कारण वे दीपावली कैसे मनाएंगे। ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से रकम सिंह सैनी, अनिल कुमार, मोहित शर्मा, मनोज कुमार, अर्चना गोयल, योगिता सैनी, सलोनी गुप्ता, अंजली गर्ग, संगीता गुप्ता, मनीशा गुप्ता, राजीव मोहन गोयल, रीतू गोयल, कामना, रितू मौर्या, सुमन मित्तल आदि शामिल रहे।
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