मुजफ्फरनगर। जिले के प्राथमिक शिक्षकों ने अपनी 20 सूत्रीय मांगों को लेकर कलक्ट्रेट पर एक दिवसीय धरना देकर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने पांच फरवरी को फिर से डीएम कार्यालय पर धरना देने और 26 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की। बाद में एसडीएम सदर को मुख्यमंत्री के नाम बीस सूत्रीय ज्ञापन सौंपा, जिसमें शिक्षकों की पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मुख्य मांग रही।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले जिले के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के सैकड़ों शिक्षकों, शिक्षिकाओं ने बुधवार को डीएम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। प्राथमिक के शिक्षक अवकाश लेकर धरने में शामिल हुए। शिक्षकों ने अपनी मांगों में पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, अंतर जनपदीय स्थानांतरण करने, मृतक आश्रितों को अध्यापक पद पर नियुक्ति दिए जाने आदि 20 मांगे शामिल रही।
प्राथमिक संघ के जिला संयोजक राजेंद्र सिंह और सह संयोजक सुभाषचंद शर्मा ने कहा कि शिक्षकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं होगा। संघ शिक्षकों के हकों के लिए आंदोलन की राह पर है। उच्च प्राथमिक संघ के जिलाध्यक्ष संजीव बालियान ने शिक्षकों से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। कपिल तोमर, सुनील कुमार शर्मा, बालेंद्र कुमार, अमित शर्मा, पुष्पेंद्र कुमार, कुलदीप कुमार, ऋषिराज, सत्येंद्र कुमार, मयंक शर्मा, इंदू भूषण शर्मा आदि ने भी विचार रखे। कुछ वक्ताओं ने बीएसए कार्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर होने का आरोप लगाया।
मांगों के समर्थन में पांच फरवरी को फिर डीएम कार्यालय पर धरना देने और 26 फरवरी को जंतर-मंतर नई दिल्ली में धरना प्रदर्शन करने की घोषणा की गई। एसडीए सदर को मुख्यमंत्री के नाम 20 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन दिया गया। बलेराम, राजश्री, योगेश कुमार, संजय, रश्मि मिश्रा, प्रदीप कुमार, संदीप कुमार, मोनिका शर्मा, उषा, रुपाली, अमरेश शर्मा आदि धरने में शामिल रहे। अध्यक्षता तैमूर लंग और संचालन डॉ अनुज कुमार ने किया।
गुटबाजी में बंटे रहे शिक्षक
मुजफ्फरनगर। 20 सूत्रीय मांगों को लेकर किए जा रहे आंदोलन में भी बुधवार को प्राथमिक शिक्षक गुटबाजी में बंटे रहे। राजेंद्र भारसी गुट ने अलग और संजय कुमार दहिया गुट ने अलग धरना दिया। दोनों गुटों ने डीएम कार्यालय पर धरने दिए। दहिया गुट के धरने में संजय कुमार, हरवीर सिंह, मुनेश कुमार, बिजेंद्र कुमार चौहान आदि शिक्षक शामिल रहे। इस गुट ने अपना अलग से ज्ञापन दिया। शिक्षकों की गुटबाजी धरनास्थल पर चर्चा का विषय बनी रही। कुछ वक्ताओं ने इस गुटबाजी पर नाराजगी प्रकट की। साथ ही कुछ वक्ताओं ने कहा कि यह गुटबाजी उचित नहीं है, इससे नुकसान शिक्षकों का ही होगा, इसलिए गुटबाजी भूल कर एक मंच पर आकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष करना होगा। शिक्षिकाओं ने अपने संबोधन में शिक्षकों से गुटबाजी भूल कर एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया।