मुजफ्फरनगर। सावधानी और जानकारी का अभाव लोगों को सिफलिस जैसी संक्रामक बीमारी की गिरफ्त में पहुंचा रहा है। बीमारी का दायरा एड्स की तरह बढ़ता जा रहा है। तीन लोगों में सिफलिस की पुष्टि हुई है। बीमारी का संक्रमण एक मरीज के दिमाग तक जा पहुंचा है। एम्स से आई रिपोर्ट के बाद रोगी का उपचार शुरू किया गया है।
यौन संचारित संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी सिफलिस का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। जिला अस्पताल में सिफलिस पीड़ित रोगियों को उपचार दिया जा रहा है। मौजूदा माह में तीन रोगियों में सिफलिस की पुष्टि हुई है। जिन सहित 27 रोगियों का उपचार जारी है। इनमें से एक रोगी में सेकेंड स्टेज की सिफलिस पाई गई है। एम्स दिल्ली में कराई गई जांच के बाद संक्रमण के दिमाग तक पहुंचने की पुष्टि हुई।
उपचार न कराने पर दूसरे स्टेज में पहुंच जाती है बीमारी
जिला अस्पताल एआरटी सेंटर के चिकित्साधिकारी डॉ.मुजीबुर्रहमान ने बताया कि बीमारी का पहला चरण सिफलिस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के दो से 12 सप्ताह बाद होता है। इस चरण के दौरान, जननांगों या मुंह पर एक चिकना, सख्त घाव विकसित हो जाता है। यह घाव कुछ हफ्तों या महीनों में अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं होता कि सिफलिस की बीमारी ठीक हो गई। उपचार न कराने से संक्रमण दूसरे चरण में चला जाता है।
सिफलिस की बीमारी के ये हैं प्रमुख लक्षण
जिला अस्पताल के चिकित्साधिकारी ने बताया कि सिफलिस के प्रमुख लक्षणों में बुखार, थकान और मांसपेशियों में दर्द शामिल है। बीमारी के दौरान रोगी के शरीर का वजन घटने लगता है जबकि बालों का तेजी से झड़ना भी सिफलिस का प्रमुख लक्षण हैं।