बीते वर्षों के मुकाबले अधिक समय तक सर्दी पड़ने के साथ स्वाइन फ्लू का प्रकोप भी बढ़ता जा रहा है। जिले में अब तक 23 रोगी सामने आ चुके हैं। इनमें से तीन की मौत हो गई। अब से पहले जिले में इतने रोगी नहीं मिले। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि यदि गर्मी शुरू हो जाती तो स्वाइन फ्लू का वायरस निष्क्रिय हो जाता और इतने रोगी नहीं मिलते।
स्वाइन फ्लू के मामले बीते पांच-छह वर्षों से सामने आ रहे हैं, लेकिन इस बार तो हद ही हो गई। जिले में अब तक 23 रोगियों को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। तीन की मौत भी हो गई। स्वाइन फ्लू एन1एच1 वायरस से फैलता है। इसका वायरस हल्की सर्दी में सक्रिय हो जाता है, जबकि ज्यादा सर्दी और ज्यादा गर्मी में कम प्रभावी रहता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कहते हैं कि इस बार सर्दी का मौसम लंबा हो गया है।
अमूमन फरवरी माह में गर्मी शुरू हो जाती थी, लेकिन मार्च में भी अच्छी खासी ठंड पड़ रही है। स्वाइन फ्लू का वायरस उस समय ज्यादा सक्रिय होता है, जब तापमान ज्यादा से कम हो रहा हो या कम से ज्यादा की ओर बढ़ रहा हो। यानि अक्तूबर माह में सर्दियां शुरू होने तथा फरवरी माह में सर्दियां खत्म होने के दौरान मामले ज्यादा सामने आते हैं। इस बार भी ज्यादातर केस फरवरी माह में ही सामने आए हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है कि इन दिनों न तो कड़ाके की सर्दी है और न ही गर्मी। मौसम ठंडा बना हुआ है। ठंड का मौसम जितना लंबा हो रहा है, उतने ही ज्यादा रोगी बढ़ रहे हैं।
इस बार सर्दियां लंबी हो गई हैं। मार्च माह में भी ठंडक बनी हुई है। ऐसे में स्वाइन फ्लू का वायरस सक्रिय रहता है। गर्मी शुरू होते ही वायरस निष्क्रिय हो जाएगा। बीते वर्षों के मुकाबले इस बार ज्यादा केस सामने आए हैं।
डा. वीके सिंह, एसीएमओ।
प्रभावित व्यक्ति के संपर्क में न आएं
मुजफ्फरनगर। स्वाइन फ्लू को एच1एन1 के नाम से भी जाना जाता है। यह सूअरों के श्वसन तंत्र से निकले वायरस से होता है। प्रभावित व्यक्ति के संपर्क में आने से रोग फैलता है।
बीमारी के लक्षण
- तेज बुखार
- तेज ठंड लगना
- गला खराब हो जाना
- मांसपेशियों में दर्द होना
- तेज सिरदर्द होना
- खांसी आना
- कमजोरी महसूस करना आदि।