मुजफ्फरनगर। उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में हाइकोर्ट प्रयागराज ने प्रदेश के सभी जनपदों की बार एसोसिएशन पर हड़ताल करने की पाबंदी लगा दी है। यदि किसी कार्य दिवस में कार्य से विरत रहने या हड़ताल की घोषणा की जाती है, तो संबंधित बार के पदाधिकारियों को हटाने की कार्रवाई हो सकती है। जिला जज अजय कुमार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की कॉपी बार संघों को भेज दी है।
देश की शीर्ष अदालत ने हड़ताल पर सख्ती करने के लिए महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। उसी के अनुसार उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में आदेश का पालन कराने के लिए उच्च न्यायालय ने पत्र भेजा है। फैजाबाद बार एसोसिएशन बनाम बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के मामले में सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले महीने 20 दिसंबर को आदेश पारित किया था। इस आदेश में नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को निर्देश जारी किए। यह आदेश उत्तर प्रदेश राज्य के सभी जिला बार एसोसिएशन पर लागू होंगे। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से स्थिति की निगरानी के लिए कम से कम तीन न्यायाधीशों की एक समिति गठित करने के लिए कहा है, यदि कोई बार एसोसिएशन इन निर्देशों की अवहेलना करेगी तो निर्वाचित पदाधिकारियों को हटाया भी जा सकता है। जिला जज ने उच्च न्यायालय के पत्र के साथ उच्चतम न्यायालय से पारित वर्णित आदेश की छाया प्रति जिला बार एसोसिएशन, सिविल बार संघ, बुढ़ाना, खतौली और जानसठ बार संघों को प्रेषित किया है।
इनसेट
यह कहा गया था आदेश में
बार एसोसिएशन न्यायालय के कार्य दिवसों पर काम से विरत रहने का कोई प्रस्ताव पारित नहीं करेगा। यदि ऐसा होता है, तो उच्च न्यायालय पदाधिकारियों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकता है। इस कार्रवाई में दंडात्मक कार्रवाई के रूप में पदाधिकारियों को हटाना भी शामिल हो सकता है।