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वहलना का मुस्लिम परिवार चार पीढ़ियों ने बना रहा है पुतले

Wed, 27 Sep 2017 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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रावण का पुतला बनाते परिवार के सदस्य। - फोटो : अमर उजाला
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दशहरा पर्व वहलना के एक मुस्लिम परिवार के लिए जीविकोपार्जन का जरिया है। इस परिवार की चार पीढ़ियां बीते 73 वर्ष से रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण के पुतले बनाती आ रही है। शहर के अलावा जिले की अधिकांश रामलीलाओं में दशहरा पर्व पर इनके बनाए हुए पुतलों का ही दहन किया जाता है। 
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शहर के निकटवती गांव वहलना निवासी पांच भाई अली मियां, हसन मियां, हुसैन मियां, शान मियां, मोहम्मद मियां दशहरा पर्व पर रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण के पुतले बनाते हैं। यह इनका पुश्तैनी काम है। परिवार की चार पीढ़ियां बीते 73 साल से पुतले बनाती आ रही हैं। अली मियां बताते हैं कि उनके दादा इतरत हुसैन उर्फ बुंदू ने दशहरा पर्व के लिए रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण के पुतले बनाने शुरू किए थे। अपने उस्ताद कैय्या से उन्होंने इस हुनर को सीखा और इसे परिवार की रोजी-रोजी का जरिया बनाया।

दादा के बाद उसके पिता स्वर्गीय फिरोज अली पुतले बनाने लगे। पिता के बाद पांचों भाई भी बीते कई दशक से पुतले बनाते आ रहे हैं। अब उनकी चौथी पीढ़ी के तौसीफ, मासूम मियां, शुऐब हसन, समीर हसन, राहत मियां आदि बच्चे इस हुनर को सीख कर परिवार की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार के मुखिया अली मियां बताते हैं कि वह पंजाब, हरियाणा आदि स्थानों पर भी पुतले बनाते हैं। वैसे हसन मियां वेल्डर और तौफीफ इलेक्ट्रीशियन हैं। दशहरा पर्व से करीब डेढ़ माह पहले ही सभी भाई अपना अन्य कार्य छोड़कर पुतले बनाने में जुट जाते हैं। इससे अच्छी रोजी मिलती है। 
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सात रामलीलाओं के ऑर्डर मिले 
मुजफ्फरनगर। अली मियां बताते हैं कि उनके बनाए पुतले शहर और जिले की अधिकांश रामलीलाओं की ओर से दशहरा में दहन होते हैं। कई रामलीला कमेटी से वह जुड़े हुए हैं। कमेटी के सभी लोगों का उन्हें पूरा स्नेह मिलता है। इस बार उन्हें पटेलनगर, रामपुरी, कच्ची सड़क, टाउन हाल, रोहाना कलां, नईमंडी, शाकुंतलम, आवास विकास की रामलीलाओं की ओर से उन्हें पुतले बनाने का आर्डर मिला है। वह 45 फीट तक के ऊंचे पुतले बना चुके हैं। छोटे पुतले 10 हजार और बड़े पुतले 15 हजार तक के बनते हैं। वे एक साथ 12 रामलीलाओं के आर्डर लेकर 36 पुतले भी बना चुके हैं। 

महिलाएं और बच्चे बंटाते हैं हाथ  
मुुजफ्फरनगर। रामलीलाओं से पुतले बनाने का ऑर्डर करीब दो माह पहले मिल जाता है। ऐसे में पांचों भाइयों का पूरा परिवार रावण, मेघनाथ, कुंभकरण के पुतले बनाने में जुटता है। परिवार की महिलाएं और बच्चे भी पूरी शिद्दत से बड़ों का हाथ बंटा कर पुतले बनवाने में जुटते हैं। इस बार उन्हें 21 पुतले बनाने हैं। 
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