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धरी रह गईं अटकलें, टिकट पर नहीं बनी सहमति

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धरी रह गईं अटकलें, फाइलों से बाहर नहीं निकले टिकट
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मुजफ्फरनगर। सियासत की गलियों में गठबंधन के टिकटों को लेकर लगाई जा रही अटकलें धरी रह गईं। रालोद-सपा के बीच मुरादाबाद, मेरठ और सहारनपुर मंडल की सीटों को लेकर सहमति नहीं बन सकी है। दोनों दलों ने एन वक्त पर अपनी-अपनी सूची रोक दी है। दिनभर इंतजार करते रहे समर्थकों को लखनऊ और दिल्ली से मायूसी मिली।
सपा-रालोद गठबंधन की सीटों को लेकर सहमति बनती दिख रही थी। रालोद को 36 सीटें दिए जाने का दावा किया गया, लेकिन आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। बातचीत का दौर शुरू हुआ तो रालोद के हिस्से में आई सीटों पर सपा के प्रत्याशी उतारे जाने पर पेंच फंस गया। पहले बताया गया कि सपा के प्रत्याशी पश्चिम की जाट बाहुल्य छह सीटों पर रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन सपा ने आठ सीटों का दावा कर दिया। बड़ौत और बुढ़ाना सीट पर सपा ने अपना प्रत्याशी उतारने की बात कही। यही हाल मुरादाबाद मंडल की सीटों को लेकर हुआ।
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रालोद ने यहां गठबंधन में ज्यादा हक मांगा, लेकिन सहमति नहीं बनी। एनसीपी के उम्मीदवार को बुलंदशहर की अनूपशहर सीट से प्रत्याशी बनाने की चर्चा चली, इस पर भी सपा-रालोद के बीच बात बिगड़ी। असल में अनूपशहर सीट को रालोद के हिस्से में माना जा रहा था, लेकिन गठबंधन में साझीदार एनसीपी के प्रत्याशी का उतारे जाने की चर्चा से मामला लटक गया। देर शाम तक माथापच्ची के बावजूद सहमति नहीं बनी, जिस कारण दोनों दलों ने अपनी-अपनी सूची रोक दी है।
रालोद के कोटे से जाटों को खुश करना चाहती है सपा
गठबंधन मेें चुनाव लड़ना तय है। सपा अपने जाट नेताओं को रालोद के कोटे से चुनाव लड़ाकर खुश करना चाहती है। यही वजह है कि रालोद के हिस्से की सीटों पर सपा दावा कर रही है या फिर रालोद के सिंबल पर अपने प्रत्याशी उतारना चाहती है। जबकि मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर सपा अपने प्रत्याशी उतार रही है।
बुढ़ाना में बालियान के सामने मलिक का पेंच
सियासत में बुधवार को नई हवा भी बही। बुढ़ाना सीट से पूर्व विधायक राजपाल बालियान रालोद से टिकट के दावेदार हैं। लेकिन अराजनीतिक भाकियू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक का नाम सपा की ओर से बुढ़ाना सीट के लिए आगे बढ़ा दिया गया। जिस पर दोनों दलों में पेंच फंस गया।
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छपरौली के लिए एक अनार सौ बीमार
बागपत की छपरौली सीट पर एक अनार सौ बीमार की स्थिति बनी हुई है। रालोद के कोटे की इस सीट पर सबसे ज्यादा दावेदार टिकट मांग रहे हैं। यह भी चर्चा है कि कई लोग नौकरी से वीआरएस लेकर जयंत सिंह से मिलने पहुंच गए, लेकिन अभी तक टिकट नहीं मिला।
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