प्रदेश में हुए सपा-कांग्रेस गठबंधन की जिले में असली परीक्षा होगी। सपा यहां पांच और कांग्रेस एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। गठबंधन का मुख्य आधार मुस्लिम वोट बैंक है। इसी के साथ दोनों दलों का परंपरागत वोट एक-दूसरे पर ट्रांसफर होगा। इसी पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। दोनों दलों के बड़े नेता गठबंधन धर्म निभाने के निर्देश भी स्थानीय कार्यकर्ताओं को दे चुके हैं।
जिले की सभी छह सीटों पर गठबंधन को लेकर सपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की असल परीक्षा होगी। जिले में सपा पांच और कांग्रेस एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस को केवल पुरकाजी विधानसभा सीट मिली है। इस सीट से पुरकाजी ने वर्ष 2012 में दूसरे स्थान पर रहे दीपक कुमार को फिर से अपना प्रत्याशी बनाया है। इसी सीट पर दोनों दलों के बीच खाई बढ़ी है। सपा प्रत्याशी उमाकिरण ने नामांकन के बाद अपना पर्चा वापस नहीं लिया और उन्हें चुनाव चिह्न साइकिल जारी हो गया। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने उमाकिरण को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है।
इसके अलावा सभी पांचों सीटों शहर, बुढ़ाना, मीरापुर, चरथावल, खतौली पर सपा चुनाव लड़ रही है। बुढ़ाना से सपा ने जिला बार संघ अध्यक्ष प्रमोद त्यागी, खतौली से पूर्व सांसद संजय चौहान के बेटे चंदन चौहान, मीरापुर से लियाकत अली, शहर से पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के पुत्र गौरव स्वरूप, चरथावल से मुकेश चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया है। जिले में दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के सामने गठबंधन धर्म निभाने का सवाल है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव नसीब सिंह और पूर्व सांसद जयप्रकाश अग्रवाल ने कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर उन्हें निर्देश दिए कि वह सपा प्रत्याशियों के लिए कार्य करें। इसी तरह के निर्देश सपा नेताओं को पार्टी हाईकमान ने दिए हैं। यदि दोनों दलों के वोट एक-दूसरे को ट्रांसफर होते हैं तो दूसरे दलों के लिए गठबंधन बड़ी चुनौती बन जाएगा। अगर यदि ऐसा नहीं हो पाता है तो यह बीजेपी और बसपा के लिए सीधे लाभकारी होगा।