जानसठ से साइकिल पर गुजरता प्रवासी श्रमिक सोनू।
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जानसठ। प्रवासी श्रमिक जान जोखिम में डालकर भी अपने आशियानों की ओर कदम बढ़ाते जा रहे हैं। श्रमिकों ने बताया कि पुलिस के डर से वे साइकिल लेकर ही यमुना पार करने लगे। यमुना का पानी गले तक पहुंचा, तो लगा कि अब जान नहीं बचेगी। इसी दौरान एक व्यक्ति ने हाथ पकड़ करके किनारे तक पहुंचाया, तब जाकर जान में जान आई।
बदायूं के रहने वाले सोनू व सोराज शुक्रवार को साइकिल होते हुए कस्बे में पहुंचे। इन्होंने बताया कि वे चंडीगढ़ में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन में वे वहां फंस गए। वाहनों का साधन नहीं मिलने पर उन्होंने अपने परिजनों को फोन करके अपने खातों में पैसे डलवाए। एटीएम से रुपये निकालकर तीन-तीन हजार रुपये में पुरानी साइकिल खरीदी और घर के लिए निकल पड़े। पंजाब सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली और पुलिस ने बॉर्डर पार होने नहीं दिया। इसलिए वे पुलिस डर से बचते हुए यमुना के अंदर से साइकिल लेकर ही पार करने लगे। यमुना पार करते हुए उनके गले तक पानी पहुंच गया था। गले तक पानी आने पर ऐसा लगा कि अब तो जान चली ही जाएगी। इस दौरान वहां से गुजरने वाले एक व्यक्ति ने यमुना के अंदर पहुंचकर उनके हाथ पकड़े और बाहर किनारे तक पहुंचाया। श्रमिकों ने बताया कि सहारनपुर पहुंचने पर यूपी पुलिस ने रोक लिया। पुलिस ने कहा कि बस से ही उनके घर भेजा जाएगा। तीन दिनों तक उनको वहां रखा गया, लेकिन बस से नहीं भेजा गया। इसके बाद वे साइकिल पर ही अपने घर की ओर निकल पड़े।