सोलानी के कोप से निजात के इंतजार में 20 गांव
पुरकाजी। सोलानी नदी के खादर क्षेत्र में बसे करीब 20 गांव की आबादी को हर साल आने वाली बाढ़ से निजात का इंतजार है। उत्तराखंड की पहाड़ियों से पानी आते ही नदी का जलस्तर बढ़ जाता है और आसपास के गांव जलमग्न हो जाते हैं। हर साल हजारों हेक्टेयर फसल का नुकसान होता है और गांव के रास्ते तक बंद हो जाते हैं। प्रभावित गांवों की करीब 50 हजार से ज्यादा की आबादी नदी के तटबंध निर्माण की आस लगाए बैठी है।
किसान अच्छी फसल के लिए बारिश का इंतजार करते हैं, लेकिन सोलानी नदी के खादर क्षेत्र में बसे गांवों के किसानों की धड़कने बारिश के साथ तेज होने लगती है। दरअसल ज्यादा बारिश होने पर उत्तराखंड की पहाड़ियों से सोलानी नदी में पानी छोड़ा जाता है, जो आसपास के क्षेत्र में फैलकर फसलों को नुकसान पहुंचाता है। 20 गांवों की लगभग 50 हजार की आबादी हर साल बाढ़ के दंश को झेलती है। नदी का पानी न केवल फसलों को जलमग्न करता है, बल्कि गांवों में भी आ जाता है। इससे रास्ते बंद हो जाते हैं और गांवों का आपसी संपर्क तक कट जाता है। ऐसे में आवागमन के लिए केवल नाव ही एकमात्र सहारा होती है। छात्र-छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए नाव से जाना पड़ता है।
सोलानी में पानी के साथ बढ़ जाती हैं धड़कनें
पुरकाजी। खादर क्षेत्र के गांवों के निवासी सरदार कुलवंत सिंह, देविंदर सिंह, गुरमीत सिंह, प्रधान जोगेंद्र सिंह, ज्ञानी जसविंदर सिंह , राजेंद्र पांचली, साधु राम, बिजेंद्र सिंह, यादराम, सरदार बलवंत सिंह, सतनाम सिंह, गुरनाम सिंह आदि ने कहा कि हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या से कई बार क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीण कहते हैं कि चुनाव के दौरान तो नदी किनारे तटबंध बनवाने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं। वे बताते हैं कि बीते करीब एक दशक ग्रामीण सोलानी में आने वाली बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। प्रतिवर्ष करीब तीन माह बेहद परेशानी भरे होते हैं। हर वर्ष लाखों रुपयों की फसल सोलानी नदी के पानी की भेंट चढ़कर बर्बाद हो जाती है। छात्र-छात्राओं व ग्रामीणों को महीनों तक नाव में बैठकर जान जोखिम में डालकर सोलानी नदी पार करनी पड़ती है। रात में कोई बीमारी या अन्य घटना हो जाने पर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा भी नहीं मिल पाती। ग्रामीण पशुओं का चारा तक नहीं ला पाते।
इन्होंने कहा...
पुरकाजी। क्षेत्रीय भाजपा विधायक प्रमोद ऊंटवाल का कहना है कि सोलानी नदी का तटबंध बनवाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर प्रस्ताव शासन को भिजवाया गया है। मुख्यमंत्री से मिलकर प्रस्ताव पास कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही खादर के ग्रामीणों को सोलानी से आने वाली बाढ़ से निजात मिल सकेगी। इसके अलावा कुछ ग्रामीण गांव रामनगर-रतनपुरी के बीच लोहे का पुल बनवाने की मांग कर रहे हैं। पुल भी जल्द ही बनवाया जाएगा।
प्रस्तावित है 111 करोड़ की लागत का तटबंध
पुरकाजी। सिंचाई विभाग के एसडीओ अशोक जैन बताते हैं कि सोलानी नदी का तटबंध उत्तराखंड के गांव मथाना से उत्तर प्रदेश के गांव शाहदरा शुक्रताल तक कुल 23 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित है। इसमें कुल 111 करोड़ की लागत आएगा। तटबंध निर्माण का प्रस्ताव प्रदेश सरकार के पास भेज दिया गया है। जो पहले पटना बिहार जाएगा, वहां से केंद्र सरकार के पास जाएगा। उसके बाद केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को तटबंध बनाने की अनुमति प्रदान की जाएगी। उसके उपरांत ही तटबंध बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस प्रक्रिया में करीब एक वर्ष तक लगने का अनुमान है। इसके बाद काम शुरू होगा तो लगभग एक वर्ष का समय तटबंध निर्माण में लगने की उम्मीद है।