झाड़-फूंक के चक्कर में गई जान
पीएचसी प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि मृतक किसान के परिजन उसे पहले झाड़-फूंक वाले के पास ले गए थे। इसके बाद ही उसे पीएचसी लाया गया। समय पर अस्पताल न पहुंचने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना महत्वपूर्ण है। झाड़-फूंक से समय बर्बाद होता है और स्थिति बिगड़ जाती है।
सर्पदंश से घबराए नहीं, उपचार कराएं : सीएमओ
सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया का कहना है कि सर्पदंश के बाद घबराएं नहीं, बल्कि शांत रहें और पीड़ित को भी शांत रखें। पीड़ित को आराम से लेटा दें और शरीर को स्थिर रखें। डसे गए अंग को हृदय के स्तर से नीचे रखें। शरीर पर कसे हुए कपड़े, चूड़ियां, कड़े, घड़ी या अंगूठियां तुरंत उतार दें। घाव के साथ छेड़छाड़ न करें। दौड़ने या भागने से जहर तेजी से फैलता है। पीड़ित को शराब, नशीली वस्तुएं या कैफीन युक्त पेय पदार्थ न दें। झाड़-फूंक, जहर चूसने, चीरा लगाने या किसी भी घरेलू उपचार से बचें। चिकित्सक की सलाह के बिना कोई दवा न दें। सर्पदंश की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण है कि पीड़ित को तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। समय पर एंटी-स्नेक वेनम का इंजेक्शन जीवन बचा सकता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों में जहर का असर अधिक गंभीर हो सकता है, इसलिए उनके उपचार में बिल्कुल भी देरी न करें।
यह दिखाई दे सकते हैं लक्षण
जहरीले सांप के डसने के बाद तेज दर्द, छाला पड़ना, सूजन, लालिमा, नीलापन, रक्तस्राव, काला पड़ना या सुन्न होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। सांप के जहर से ऊतक नष्ट हो सकते हैं, तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो सकता है, रक्तचाप और हृदय पर असर पड़ सकता है, या रक्तस्राव हो सकता है। रक्तचाप, कमजोर नाड़ी, तेज धड़कन, उल्टी, दस्त, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, देखने में समस्या, हाथ-पैर का ठंडा पड़ना, सुन्न पड़ना और पसीना आना शामिल हो सकते हैं।