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Muzaffarnagar News: पचास हजार की रिश्वत के मामले में एसआई की जमानत अर्जी खारिज

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मुजफ्फरनगर। थाना सिविल लाइन में 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए उपनिरीक्षक प्रवीण शर्मा की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई। विशेष न्यायालय संख्या-1 (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) सहारनपुर ने सीबीआई बनाम संतोष कुलकर्णी केस में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार हमारे समाज के लिए एक गंभीर खतरा है और इससे सख्ती से निपटना चाहिए। भ्रष्टाचार एक ऐसा पेड़ है, जिसकी डालियां बहुत लंबी होती हैं और वह हर जगह फैल जाती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में सावधान रहने की जरूरत है।
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चरथावल के गांव कसौली निवासी ओमपाल आर्य ने 29 जून को शिकायत दर्ज कराई। एक जुलाई को सिविल लाइन थाने में एंटी करप्शन टीम के प्रभारी कुशलवीर सिंह के साथ पहुंची 12 सदस्यीय टीम ने जलाया बिछाया और एसआई प्रवीण शर्मा को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया था।
निरीक्षक मुकेंद्र कुमार की तरफ से भ्रष्टाचार अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। सिखेड़ा थाने में आरोपी से पूछताछ की गई। इसके बाद सहारनपुर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम न्यायालय ने अभियुक्त को जेल भेज दिया था। बचाव पक्ष की ओर से जमानत अर्जी दाखिल करते हुए तर्क दिया गया कि शिकायतकर्ता ने उसकी जेब में रुपये रखने की कोशिश की।
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शिकायतकर्ता के हाथ से रुपये दूर जाकर गिर गए थे। एंटी करप्शन टीम ने रुपये उठाने का दबाव बनाया। रुपये खुद एंटी करप्शन टीम ने ही उठाए थे।
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ये था मामला
दूधली निवासी मुकेश आर्य ने चार मार्च 2025 को सिविल लाइन थाने में कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि वह शहर आर्य समाज के निर्वाचित प्रधान हैं। जबकि कसौली निवासी ओमपाल आर्य खुद को शहर आर्य समाज का प्रशासक, ज्ञानेंद्र सिंह मलिक को सह प्रशासक, सतीश, भानु प्रताप सिंह, गजेंद्र सिंह श्रवण सिंह व अन्य को सलाहकार दर्शा रहा है। इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर एसएसआई प्रवीण शर्मा पर दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया। ओमपाल आर्य ने शिकायत दर्ज कराई , जिसके बाद 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
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