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मौसम बदलने से हो रही बीमारी, सतर्क रहे

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खतौली। मौसम में बदलाव के साथ नगरवासी सर्दी, जुखाम, बुखार के चपेट में आ रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि सीएचसी में अभी तक डेंगू का कोई भी मरीज नहीं पहुंचा। डेंगू तथा मलेरिया की जांच की किट अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
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कोविड-19 के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए साफ-सफाई के साथ सोशल डिस्टेंसिंग को सबसे बड़ी दवा मानी जा रही है, लेकिन मौसम के परिवर्तन के साथ-साथ सिर दर्द, गले में खराश, नजला, बुखार के लक्षण देखे जा रहे हैं। सतर्कता से ही इन बीमारियों से बचा जा सकता है। सीएचसी में प्रतिदिन 200 मरीज ओपीडी में उपचार करा रहे हैं। मरीजों की कोविड़- 19 की जांच भी कराई जा रही है। वही आशाओं द्वारा संचारी रोग नियंत्रण अभियान के अंतर्गत मलेरिया और डेंगू को ध्यान में रखते हुए स्लाइड बनाई जा रही है। गांव-गांव में भी सफाई अभियान चल रहा है। फॉगिंग कराई जा रही है।
सीएचसी अधीक्षक मुकेश उपाध्याय ने बताया कि अस्पताल में डेंगू मलेरिया की किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। प्लेटलेट्स की व्यवस्था जिले पर है। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम में कुछ बीमारी होती है, जिनमें बुखार, जुखाम, सिर दर्द आदि शामिल हैं। यदि कोई इन बीमारियों से पीड़ित है तो उसे अपना कोविड-19 का भी टेस्ट कराना चाहिए। साथ ही झोलाछाप डाक्टरों की जगह अच्छे चिकित्सकों से ही उपचार कराएं। सीएचसी में आकर उपचार कराएं तो बेहतर हैं।
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आयुर्वेदाचार्य डा. केएस भौज्ञान ने बताया कि हर वर्ष सितंबर से नवंबर के महीने तक मौसम बदलता है, इसमें लोग मौसमी बीमारियों का शिकार होते हैं। लोगों का आयुर्वेदिक दवाइयों की तरफ रुझान बढ़ा है, इनका कोई साइड डिफेक्ट नहीं है। विदेशों में भी आयुर्वेद को अपनाया जा रहा है। कोविड-19 में आयुर्वेद के अनुसार ही काढ़ा बनाकर पीया जा रहा है, जिससे इम्युनिटी पॉवर बढ़ रही है। बीडीओ पवन कुमार का कहना है कि गांव-गांव में सफाई अभियान चलाया हुआ है। फॉगिंग कराई जा रही है, जिससे ग्रामीणों को बीमारी से बचाया जा सके।
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