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रोजी-रोटी की खातिर यहां हर रोज दांव पर लगानी पड़ती है जिंदगी

Thu, 12 Jan 2017 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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पशुओं को नाव पर लादकर गंगा पार करते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
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मुसीबतें क्या होती हैं और जान का खतरा क्या होता है यह शुक्रताल क्षेत्र के किसान, युवा और ग्रामीणों से बेहतर कोई नहीं बता सकता है। रोजमर्रा के कामों को पूरा करने के लिए जिंदगी दांव पर लगती है। पुल नहीं होने से नाव से गंगा के पार जाना पड़ता है। ग्रामीण न केवल जानवर बल्कि ट्रैक्टर तक नाव में लादकर पार जाते हैं। रोजी-रोटी के लिए लोगों की यह रोजाना की जंग है। 
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गंगा के आसपास के गांवों के लोगों के खेत उस पार हैं। खेतों में जाने के लिए उन्हें गंगा पार करनी ही है और इसके लिए नाव एक मात्र साधन है। इसके अलावा रिश्तेदारियों या अन्य कामों के लिए भी नाव से ही जाना पड़ता है। इसी तरह से उस पार से ग्रामीणों को तीर्थस्थल शुक्रताल जाने के लिए नाव का ही सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीण यही रास्ता यदि सड़क से तय करते तो उन्हें गंगा मंडावर थाने के गांव चाहड़वाला तक जाने के लिए 70 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है।

इस सफर में करीब दो से ढाई घंटे का समय लगता है। ऐेसे ही बिजनौर जिले से मोरना, शुक्रताल आने वाले लोगों को समय और पैसा लगाना पड़ता है। चूंकि दोनों जिलों की सीमा को जोड़ने के लिए गंगा पर पुल नहीं है। कई वर्षों से चाहड़वाला गांव के किनारे गंगा नदी पर पुल बनाए जाने की मांग चली आ रही है, लेकिन यह पूरा नहीं हो सकी है। इससे ग्रामीणों और लोगों की मुसीबत बरकरार है। गंगा नदी पर पुल न होने के कारण दो जिलों के सैकड़ों गांवों की जिंदगी नरक से भी बदतर हो गई है।
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गंगा नदी को पार करने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है। किसानों, मजदूरों को भी समय और पैसा बचाने के लिए इसी नाव में सवार होकर गंतव्य को जाना पड़ता है। रोजाना जान-जोखिम में डालकर गंगा से गुजरना पड़ता है। बिजनौर क्षेत्र के गांव चाहड़वाला, रघुनाथपुर, गीदड़पुरा, औरंगाबाद, शकुरपुर, बादशाहपुर आदि के ग्रामीण मुजफ्फरनगर में अपनी रिश्तेदारियों में आने-जाने के लिए नाव से पार करना पड़ता है। 

सवा दो लाख से तैयार की नाव      
मोरना। मुसीबतों को देखते हुए पांच वर्ष पूर्व दारागंज और गढ़मुक्तेश्वर के कारीगरों को बुलाया गया। सवा दो लाख रुपये के खर्च से बने नाव के इस पुल में आठ कुंतल लोहे के गार्डर और लकड़ी के तख्ते लगे हैं। जिसे चालीस फुट का स्थाई स्टैंड के साथ गंगा में दोनों ओर खंभों में बांधा गया है। जिसमें ट्रैक्टर ले जाने का किराया 150 रुपये, बुग्गी 50, बाइक 20 और साइकिल ले जाने का किराया पांच रुपये है।      

चालकों की टुकड़ी रहती है तैनात      
मोरना। गंगा में नाव के पुल को संचालित करने के लि चालकों की टुकड़ी सुबह से शाम तक तैनात रहती है। चालकों के मुखिया जगदीश कश्यप, पाल्ली, सोनू, दिलेराम, कल्लीराम, संजू आदि ने बताया लोगों की सहायता के लिए चालकों की टीम ली है। जिसमें अर्जुन सिंह, फूल सिंह, प्रदीप चौहान, रविन्द्र आकाश, रवि, मोनू, विजय, ऋषि, रविंद्र आदि युवक शामिल हैं।       
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