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अदालत का फैसला: पति नदीम को फांसी की सजा, पहले पीटा, तलाक की धमकी...फिर जलाकर मार डाली थी पत्नी

Mon, 07 Sep 2026 01:56 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

मुजफ्फरनगर के शाहपुर शहजादी हत्याकांड में अदालत ने पति नदीम को हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा और डेढ़ लाख रुपये जुर्माना लगाया। अदालत ने मृत्युकालिक बयान को दोषसिद्धि का आधार माना।
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न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुजफ्फरनगर जनपद में शाहपुर के चर्चित शहजादी हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने पति नदीम को हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में दहेज हत्या का आरोप साबित नहीं हुआ, लेकिन मृतका के मृत्युकालिक बयान के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत नदीम को दोषी माना गया।

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मृत्युकालिक बयान बना दोषसिद्धि का आधार
अदालत ने कहा कि मृत्यु के करीब पहुंचकर बोले गए शब्द किसी स्वार्थ, लाभ या भविष्य की अपेक्षा से नहीं, बल्कि बीती हुई घटना की अंतिम स्मृति से निकलते हैं। न्यायालय ने माना कि मृत्युकालिक कथन न्यायिक विवेक की कसौटी पर खरा उतरता है और उसमें सत्यता व विश्वसनीयता का पर्याप्त आश्वासन हो तो अकेले उसी के आधार पर दोषसिद्धि हो सकती है।

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गवाह मुकर गए, फिर भी बयान पर भरोसा
मामले की सुनवाई के दौरान मृतका के पिता और वादी दिलशाद, उसकी मां और सगा भाई शाहरुख खान अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। उन्होंने अदालत में अभियुक्तों के पक्ष में गवाही दी। वादी ने कहा कि शहजादी की शादी बिना दहेज के हुई थी और ससुराल वालों ने उसे कभी प्रताड़ित नहीं किया। इसके बावजूद अदालत ने शहजादी के मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज मृत्युकालिक बयान को अहम साक्ष्य माना।

शराब पीकर मारपीट और तलाक की धमकी का बयान
24 जुलाई 2018 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के बर्न विभाग में भर्ती शहजादी का बयान तत्कालीन कार्यपालक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार ने दर्ज किया था।

शहजादी ने अपने बयान में बताया था कि शादी के करीब एक साल बाद उसका पति शराब पीकर उसके साथ मारपीट करने लगा था। वह गाली देता था और तलाक की धमकी देता था। उसके अनुसार 23 जुलाई 2018 की शाम नदीम शराब पीकर घर आया और उसके साथ मारपीट की। खाना खाने के बाद दोबारा मारपीट की और तलाक देने की बात कही। रात करीब 8:30 बजे उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी।

23 जुलाई 2018 को आग लगाई, 28 जुलाई को मौत
बागपत के निवाड़ा निवासी दिलशाद ने अपनी बेटी शहजादी का निकाह 10 जनवरी 2015 को शाहपुर में नदीम के साथ किया था। 23 जुलाई 2018 की रात शहजादी के साथ मारपीट कर उसके ऊपर केरोसिन डालकर आग लगाने का आरोप था।

झुलसी शहजादी को पहले बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज और फिर आनंद हॉस्पिटल मेरठ ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 28 जुलाई 2018 को उसकी मौत हो गई। उसका शरीर करीब 98 प्रतिशत तक जला हुआ था और मौत का कारण सेप्टिक शॉक पाया गया।

 

दहेज हत्या साबित नहीं, धारा 302 में दोषी
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि शादी के बाद कम दहेज लाने को लेकर शहजादी को प्रताड़ित किया जाता था और एक मोटरसाइकिल व एक लाख रुपये नकद की मांग की जाती थी। मामले में पति नदीम, सास शमशीदा और ननद सोनी को नामजद किया गया था। सास की ट्रायल के दौरान मौत हो गई, जबकि ननद सोनी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।

अदालत ने माना कि शहजादी के अंतिम बयान में अतिरिक्त दहेज की मांग या दहेज के लिए क्रूरता की बात नहीं थी। इसलिए धारा 304बी और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 का अपराध साबित नहीं हुआ। हालांकि, अदालत ने माना कि नदीम ने जान से मारने की नीयत से शहजादी पर केरोसिन डालकर आग लगाई थी। इसी आधार पर उसे धारा 302 में दोषी ठहराया गया।

 
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'मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं'
फैसले में न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी टिप्पणी में कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें सदैव भगवान से डरने और किसी अन्य व्यक्ति से नहीं डरने की शिक्षा दी है। उन्होंने कहा कि अगर वह बाहुबलियों, माफियाओं या अपराधियों से भयभीत होकर न्यायिक कार्य करने लगें तो जनता के न्यायालय पर विश्वास का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।

न्यायाधीश ने कहा कि यदि वह ऐसी शक्तियों से भयग्रस्त होंगे तो उनके लिए न्यायिक संस्था से त्यागपत्र देना उचित होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नहीं पसंद करूंगा।"

उन्होंने कहा कि जब तक वह अपने सिद्धांतों पर चल सकते हैं, तब तक सेवा करेंगे, अन्यथा त्यागपत्र दे देंगे। साथ ही कहा कि जब तक वह जज की कुर्सी पर हैं, फैसला लेने का अधिकार एकमात्र उनका होगा।

अदालत ने महाभारत के प्रसंग का भी उल्लेख किया
फैसले में न्यायाधीश ने महाभारत के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने न्यायिक निर्णय और कर्तव्य के संदर्भ में अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए निडर होकर न्याय करने की बात कही।
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