चुनावी रण जीतने को शाह ने दी हिंदुत्व को धार
मुजफ्फरनगर। गृहमंत्री अमित शाह ने मुजफ्फरनगर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को साधने की भरपूर कोशिश की। लाखों शिव भक्तों की आस्था के केंद्र शिव चौक पर पहुंचे और पर्चे बांटे। मुजफ्फरनगर की धरती को वीरभूमि कहकर जाटों की शान में कसीदे गढ़े। शाह के निशाने पर अखिलेश यादव रहे। जयंत सिंह के प्रति फिर से नरमी दिखाकर गठबंधन के वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश की गई। यही नहीं उन्होंने दंगों की याद दिलाने के साथ आजम खां आदि नेताओं का नाम लेकर हिंदुत्व को भी धार दी।
पहले चरण में अधिकतर उन सीटों पर चुनाव हैं, जिनमें जाट मतदाता प्रभावी हैं। किसान आंदोलन के बाद बदले माहौल को भाजपा परख चुकी है। यही वजह है कि जाटों की नब्ज पकड़ने के लिए भाजपा के क्षत्रप पश्चिम के मैदान में हैं। गृहमंत्री अमित शाह जिले में पहुंचे तो जाटों की वीरता का बखान किया। देश की रक्षा में योगदान गिनाया। राजा महेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत और शूटर दादी चंद्रो तोमर का नाम लिया। साथ में यह भी बताया कि इनके नाम पर भाजपा सरकार ने क्या-क्या किया है।
मुजफ्फरनगर दंगे का जिक्र छेड़ा तो हर घाव याद दिलाया। सपा सरकार को घरने की कोशिश की और भाजपा सरकार के कार्य गिनाए। लाखों कांवड़ियों की आस्था का केंद्र शिव चौक पर शाह पहुंचे। यहां से पश्चिमी में हिंदुत्व का संदेश देने की कोशिश की। यह भी कहा कि मुजफ्फरनगर से जो लहर उठती है वह काशी तक जाती है।
गठबंधन में सेंधमारी का प्रयास
गृहमंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार में आए तो गठबंधन के वोट बैंक में सेंधमारी के लिए बेताब दिखे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सियासी हमले किए, जबकि रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह के प्रति उनका अंदाज उतना आक्रामक नहीं रहा। इसकी वजह यह कि भाजपा की नजर रालोद के हिस्से वाले जाट वोट बैंक पर टिकी है। देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा कितनी कामयाब होगी।
भाजपा के जाट क्षत्रपों को खूब मिली तवज्जो
गृहमंत्री अमित शाह मंच पर पहुंचे तो भाजपा के जाट क्षत्रपों की खूब बातें की। केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, मंत्री भूपेंद्र चौधरी की खूब तारीफ की।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आशाराम याद किए
राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने ब्राहमण समाज के कई नाम लिए। इनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आशाराम शर्मा का नाम रहा। दधेडू गांव का नाम भी लिया गया।