रतनपुरी। गेहूं और सरसों की फसल को निराश्रित गोवंश से बचाने के लिए किसानों को ठिठुरती रातों में भी खेतों पर जागकर पहरा देना पड़ रहा है। रात के अंधेरे में झुंड बनाकर खेतों में घुसने वाले निराश्रित पशु किसानों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। यदि किसान फसल की रखवाली न करें, तो पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा है।
कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान अपनी मेहनत की कमाई को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इस विकट समस्या की ओर शासन और प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। उन्हें निराश्रित पशुओं से निजात दिलाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
किसान सुभाषचंद, सोमदत्त शर्मा, अरविंद सोम, राजकुमार शर्मा, नरेश फाैजी, रामसेवक, कुलदीप सोम, अजय कुमार, मोहन सिंह, मोनू सोम, हरिओम ने मांग रखी कि जल्द से जल्द इन निराश्रित पशुओं की समस्या का समाधान किया जाए।
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किसानों को करनी पड़ रही रखवाली
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रतनपुरी निवासी किसान संदीप सोम का कहना है कि किसान बड़ी मेहनत से खेत में फसल की बुआई करता है लेकिन इस समय किसान अपनी लागत भी वसूल नही कर पा रहे हैं। सर्द रात में किसानों को रातभर जाग कर इन निराश्रित पशुओं से खेतों में खड़ी फसल की रखवाली करनी पड़ रही है।
रात में पहरा देने को मजबूर किसान : कालू
रतनपुरी निवासी किसान कालू सिंह का कहना है कि रात में जिस समय नेतागण सर्दियों में अपने गर्म बिस्तरों में आराम फरमाते हैं, उस समय किसानों को निराश्रित पशुओं से फसल बचाने के लिए ठंडी रातों में खेतों पर पहरा देने को मजबूर होना पड़ रहा है। वे किसानों का समूह बनाकर रात को काफी देर-देर तक खेतों पर पहरा देते हैं।
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सरकार कराए गोआश्रय स्थलों का निर्माण
किसान मजदूर संगठन के खतौली ब्लॉक अध्यक्ष रतनपुरी निवासी रविकांत सोम का कहना है कि आवारा पशुओं के लिए स्थानीय स्तर पर गो आश्रय स्थल खोले गए हैं लेकिन इन आश्रय स्थलों में क्षमता से अधिक पशु है। आवारा पशुओं ने सरसों और अन्य फसलें उजाड़ दी है। पशुओं से मुक्ति के लिए सरकार अधिक संख्या में और गौ आश्रय स्थलों का निर्माण कराए।
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पशुओं को सड़कों पर छोड़ना बंद करें : श्रीओम
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रतनपुरी निवासी प्रगतिशील किसान श्रीओम सोम का कहना है कि इस समस्या के लिए कुछ हद तक हम सब भी जिम्मेदार हैं। दूध देने तक तो किसान इन पशुओं को अपने घर में रखते हैं लेकिन उसके बाद इन्हें खुला छोड़ देते हैं। इस प्रथा पर प्रभावी अंकुश होना चाहिए। इससे बड़ी संख्या में छोड़े जा रहे निराश्रित पशुओं से निजात मिल सकेगी।