अंग्रेजी शासनकाल में 1829 में कलक्ट्रेट में बनाई गई एसडीएम कोर्ट 189 साल बाद तहसील सदर में शिफ्ट की गई। अधिवक्ताओं के विरोध के चलते कोर्ट की शिफ्टिंग का कार्य शनिवार की रात 11 बजे से तड़के तीन बजे तक चला। किसी को मालूम ही नहीं हुआ कि कोर्ट स्थानांतरित हो गई है। सदर तहसील को बने 28 साल हो गए हैं, लेकिन एसडीएम कोर्ट पहली बार परिसर में पहुंची है।
शासन का आदेश है कि सभी एसडीएम तहसील परिसर स्थित कार्यालय में ही जनता की समस्या सुनेंगे। आवास भी तहसील परिसर में ही रहेगा और कोर्ट भी तहसील परिसर में ही होगी। जनपद की अन्य सभी तहसीलों के एसडीएम की कोर्ट तो जिला मुख्यालय से पहले ही तहसीलों में चली गई थी।
कलक्ट्रेट यहां 1829 में बनाई गई, तब से एसडीएम कोर्ट लगातार यहीं पर सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के बराबर में चल रही थी। 1889 में तत्कालीन डीएम एन रविशंकर की मौजूदगी में तहसील सदर मेरठ रोड पर अलग से बनाई गई। तहसीलदार की कोर्ट और ऑफिस तो इसमें बना दिए गए, लेकिन एसडीएम का ऑफिस और कोर्ट दोनों कलेक्ट्रेट में ही रहे।
2008 में तत्कालीन डीएम संतोष यादव के निर्देश पर एसडीएम ऑफिस तहसील में बनाया गया और एसडीएम ने यहीं पर बैठना प्रारंभ किया। शासन के आदेश के बाद भी एसडीएम की कोर्ट तहसील में नहीं जा सकी। इसका सबसे बड़ा कारण अधिवक्ताओं का विरोध और दूसरे एसडीएम कोर्ट का तहसील परिसर में नहीं होना था।
शनिवार रात एसडीएम कुमार धर्मेंद्र ने रात्रि में अभियान चलाकर कोर्ट को तहसीलदार की कोर्ट में शिफ्ट करा दिया। 189 साल तक कलेक्ट्रेट में चली कोर्ट सोमवार से तहसील सदर में चलेगी। एसडीएम के न्यायालय में फौजदारी और राजस्व के वाद आते है, इन सबकी सुनवाई इसी कोर्ट में होगी।
वादों की सुनवाई तहसील कोर्ट में होगी
मुजफ्फरनगर। एसडीएम सदर कुमार धर्मेंद्र ने बताया कि कलक्ट्रेट परिसर से सदर तहसील में कोर्ट शिफ्टिंग का कार्य पूरा हो चुका है। सोमवार से वह सदर तहसील के न्यायालय कक्ष नंबर-2 में बैठकर वादों की सुनवाई करेंगे। अधिवक्ताओं और वादकारियों को अब तहसील में ही आना होगा। रात्रि में शिफ्टिंग पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
डीएम से मिलकर जताएंगे विरोध
मुजफ्फरनगर। जिला बार संघ अध्यक्ष ठाकुर अनूप सिंह ने रातोंरात एसडीएम कोर्ट के स्थानांतरित करने पर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट रूम आदि की व्यवस्था होने के बाद भी कलक्ट्रेट से कोर्ट की शिफ्ट किया जाना गलत है। समस्त अधिवक्ता यहां बैठते हैं। तहसील में कोर्ट के जाने से वादकारियों और वकीलों दोनों को परेशानी होगी। डीएम से मिलकर इस पर विरोध जताया जाएगा।