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रालोद को लोकतंत्र बचाओ महापंचायत से संजीवनी की तलाश

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रालोद को लोकतंत्र बचाओ महापंचायत से संजीवनी की तलाश
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रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। राजनीति की बिसात पर 2019 के लोकसभा चुनाव में शून्य पर आउट होने वाली रालोद को लोकतंत्र महाबचाओ पंचायत से संजीवनी की तलाश है। वर्ष 2014 में भाजपा की आंधी में उड़ने के बाद रालोद आज तक पनप नहीं पाई है। पार्टी नेता जयंत चौधरी के साथ हाथरस में हुई घटना को रालोद सीधे जाट समाज के स्वाभिमान से जोड़ रही है। पार्टी का सीधा टारगेट 2022 का विधानसभा चुनाव है।
लोकतंत्र बचाओ महापंचायत पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने जा रही है। हाथरस में रालोद महासचिव जयंत चौधरी पर हमले के विरोध में हो रही यह पंचायत 2022 के चुनावी समीकरण भी लिखेगी। इस महापंचायत से प्रदेश में नए समीकरण भी बनते हुए दिखाई देंगे। सपा और रालोद के साथ कांग्रेस के नेता भी एक मंच पर दिखाई देंगे। वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में शून्य पर पहुंची रालोद को इस पंचायत से काफी उम्मीदें हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में केवल एक ही सीट पर खाता खोल पाने वाली रालोद पश्चिम में अपनी खोई ताकत को तलाश रही है। रालोद ने जयंत पर हमले को सम्मान और स्वाभिमान से जोड़कर जाटों को एक मंच पर लाने का काम शुरू किया है। इस कड़ी में जाट समाज की सभी खापों के चौधरियों ने महापंचायत को समर्थन दे दिया है। महापंचायत को लेकर रालोद पूरा माहौल बना रही है। समाज को संदेश भी दे रही है कि पार्टी में ताकत डालने के लिए एकजुटता दिखानी होगी। मामला चौधरी चरणसिंह के पौत्र का होने के कारण भाजपा को छोड़ दूसरे दलों के जाट नेता भी महापंचायत में नजर आएंगे। कांग्रेस नेता पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक और सपा के नेताओं ने मंच पर रहने की घोषणा कर दी है। महापंचायत में यदि अच्छी भीड़ रहती है तो यह रालोद के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। भीड़ का सीधा संदेश कांग्रेस और सपा पर भी जाएगा। गठबंधन में रालोद को इसका लाभ होगा।
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जयंत के बहाने एक मंच पर होंगे जाट
मुजफ्फरनगर। हाथरस में जयंत पर लाठीचार्ज को लेकर देशभर के जाट नेता एक मंच पर आ रहे हैं। भाजपा को छोड़ दूसरे दलों के नेता लोकतंत्र बचाओ महापंचायत में शिरकत कर सकते हैं। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के जाट नेता शामिल हैं। जाट समाज की विभिन्न खाप भी इस मामले में जयंत चौधरी के साथ खड़ी दिखाई दे रही हैं।
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संसद, विधानसभा में जीरो पर रालोद
मुजफ्फरनगर। रालोद का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी शून्य की स्थिति में है। 2017 के विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट जीत पाई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी शून्य पर थी, जबकि 2009 में पार्टी के पास पांच सांसद थे। 2004 में तीन और 1999 में दो सांसद थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में आठ विधायक जीते थे। 2007 में दस और 2002 में रालोद के पास 14 विधायक थे।
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