मोरना। शुकतीर्थ के हनुमत धाम में अतुलनीय पराक्रम के देव अंजनी सूत जन्मोत्सव में भक्ति, श्रद्धा और संत परंपरा का संगम दिखाई दिया। देश के साधु संतों के गरिमामयी सान्निध्य में नैष्ठिक ब्रह्मचारी स्वामी केशवानंद महाराज और स्वामी विनय स्वरुपानंद सरस्वती महाराज को विधि विधान पूर्वक महा मंडलेश्वर की उपाधि से सुशोभित किया गया।
वरिष्ठ महामंडलेश्वर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि धर्म का विरोध नहीं होता है। भारतीय संस्कृति में धर्म का संशोधन नहीं है। धर्म आदिकाल से संतों की परंपरा रही है। धर्म वह तत्व है, जो आपके हृदय में छाया हुआ है 16 देशों में हमारा धर्म स्थित है। धर्म से मनुष्य भटक सकता है, धर्म कभी नहीं भटकता। महापुरुषों के सान्निध्य में कुसंगति दूर होती है और धर्म में शरीर का त्याग करना पड़ता है। संतों का आचरण ग्रहण करने से चित्त एकाग्र रहता है।
संचालक महामंडलेश्वर आनंदपुरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म का सागर है। दिव्यानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि विश्व में केवल एक धर्म है, वह है सनातन धर्म। सृष्टि के आरंभ से ही सनातन धर्म है। उपासक के लिए आराधना आवश्यक है। अखाड़े हमारे रक्षक हैं। इनके द्वारा भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार होता है।
नवनियुक्त महामंडलेश्वर सनातन धर्म की रक्षा करेंगे। हम उनकी आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं। इसके अलावा महामंडलेश्वर स्वामी असगानंद जी महाराज ऋषिकेश, महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद गिरि महाराज हरिद्वार, आचार्य गुरुदत्त महाराज दंडी आश्रम, महामंडलेश्वर गीता मनीषी, स्वामी ज्ञानानंद महाराज, महामंडलेश्वर चिन्दवरानंद, रामेश्वरानंद गिरधारी, स्वामी महादेव आश्रम, स्वामी भगवत स्वरूपाचार्य आदि ने भी आर्शीवचन किए।
गीतानंद तीर्थ, गीतानंद गिरि, उत्तम गिरि, कृपालदास, पुरुषोत्तम गिरि, आनंद ब्रह्मचारी, आनंद स्वरूप, सीताराम शास्त्री, कंवरसेन गोयल, लक्ष्मी नारायण उपस्थित रहे।