मुजफ्फरनगर। चार साल पहले स्वास्थ्य विभाग ने 64 कर्मचारियों को नियमों की अनदेखी कर वेतन बढ़ोत्तरी के एरियर के तौर पर 1.44 करोड़ रुपये अधिक भुगतान कर दिया गया। विभाग ने आरटीआई का जवाब दिया तो सच सामने आया। आरटीआई कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की है, जिसकी शासन ने जांच शुरू करा दी है। जांच के बाद ही प्रकरण का पूरा सच सामने आएगा।
शासन ने 10 साल की सेवा पूरी करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों का एक जुलाई 1985 से समय वेतनमान में बढ़ोतरी की सुविधा प्रदान की थी। साल 2017-18 में तत्कालीन सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा के कार्यकाल में 64 स्वास्थ्यकर्मियों को 1985 के बजाए 1982 को वेतन वृद्धि का आधार मानते हुए तीन साल पूर्व से लाभ दे दिया गया। प्रकरण का खुलासा तब हुआ, जब गांव धनायन निवासी आरटीआई कार्यकर्ता विमल त्यागी ने जनसूचना अधिकार के तहत सीएमओ से जानकारी मांगी। विभाग से करीब 1.44 करोड़ रुपये अधिक का भुगतान किया गया। दायरे में आने वाले सेवारत कर्मचारियों को बढ़ोत्तरी का लाभ मिला और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन बढ़ोत्तरी में फायदा हुआ। आरटीआई को स्वास्थ्य विभाग ने चार साल तक लटकाए रखा। गलत वेतनमान स्वीकृत करने की शिकायत सीएम से की गई है। मुख्यमंत्री के उप सचिव ने डीएम चंद्रभूषण सिंह को मामले की नियमानुसार जांच कराकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
इसलिए घपले का अंदेशा, सहमत नहीं थे महानिदेशक
मामले में गड़बड़ी का अंदेशा इस वजह से बढ़ रहा है कि चार साल पहले कर्मचारी रामधन गुप्ता और हरदेव सिंह को लाभ नहीं मिलने पर प्रार्थना पत्र वित्त नियंत्रक महानिदेशक, चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश लखनऊ सुभाष चंद्र यादव के समक्ष पहुंचा था। वित्त नियंत्रक ने तब सेलेक्शन और प्रमोशन पे ग्रेड का लाभ 1982 से दिए जाने को शासनादेश का उल्लंघन बताया था। 12 सितंबर 2018 को जारी कार्यालय आदेश में कहा था कि बढ़े वेतनमान का लाभ 1985 से ही दिया जा सकता है। इस वजह से गड़बड़ी का अंदेशा बढ़ रहा है।
मेरे समय का मामला नहीं : सीएमओ
सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार का कहना है कि यह प्रकरण मेेरे कार्यकाल का नहीं है। इस वजह से उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। शासन या प्रशासन ने भी उनसे इस बाबत कोई जानकारी नहीं मांगी है। आरटीआई का जरूर जवाब दिया गया है।
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