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बोर्ड परीक्षा में नकल कराने पर 21 साल बाद 15 सौ रुपये का जुर्माना

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- सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम की धारा में नौ अप्रैल 2001 को दर्ज कराया था मुकदमा
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- अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम प्रशांत कुमार ने सुनाई सजा
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड की परीक्षा में 21 साल पहले नकल कराने के मामले में आरोपी शिक्षिका पर 1500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम प्रशांत कुमार ने फैसला सुनाया। जुर्माना नहीं देने पर शिक्षिका को सात दिन जेल की सजा भुगतनी होगी।
नौ अप्रैल 2001 को नई मंडी थाना क्षेत्र के वैदिक पुत्री पाठशाला में यूपी बोर्ड परीक्षा की द्वितीय पाली में गाइड से छात्राओं को नकल कराने का मामला पकड़ा गया था। तत्कालीन संयुक्त शिक्षा निदेशक सहारनपुर मंडल के निर्देश पर केंद्र व्यवस्थापक एवं प्रधानाचार्या संतोष गोयल ने परीक्षा कक्ष में ड्यूटी दे रही चार शिक्षिकाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपी बनाई गई शहर निवासी शिक्षिका रीता कपूर पत्नी जयपाल सिंह ने कोर्ट में शपथ पत्र देकर अपराध स्वीकार कर लिया था। प्रकरण की सुनवाई एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में हुई। अदालत ने शिक्षिका को धारा नौ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के अपराध में 1500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
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शिक्षिका ने कहा, बुजुर्ग हूं, कोई पैरोकार नहीं
अदालत में आरोपी शिक्षिका ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार किया। कहा कि वह बुजुर्ग है। उसका कोई पैरोकार नहीं है। भविष्य में कोई अपराध नहीं करेगी। उसे माफ करते हुए कम से कम दंड से दंडित किया जाएं।
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इन शिक्षिकाओं पर दर्ज हुआ था मुकदमा
नई मंडी कोतवाली में ऊषा गुप्ता, अर्चना, कामिनी और रीता कपूर के खिलाफ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया था। चारों शिक्षिकाओं ने जमानत करा ली थी। रीता कपूर के अपराध स्वीकार के बाद उसकी पत्रावली अलग कर दी गई थी। अन्य शिक्षिकाओं पर मुकदमा चल रहा है।
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