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रामरतन भारद्वाज के निधन से रोहाना शोक में डूबा

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रामरतन भारद्घाज । (फाइल फोटो) - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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रामरतन भारद्वाज के निधन से रोहाना शोक में डूबा
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मुजफ्फरनगर। पाकिस्तान के विरुद्ध वर्ष 1965 के युद्ध में बहादुरी का परिचय देने वाले रोहाना निवासी कैप्टन रहे रामरतन भारद्वाज का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से रोहाना गांव शोक में डूब गया। रामरतन भारद्वाज 1968 में आईएएस में चुने गए और पंजाब के मुख्य सचिव भी रहे। पंजाब सरकार ने रिटायरमेंट के बाद उन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष भी बनाया। उनके निधन से रोहाना गांव में शोक की लहर है। भारद्वाज का चंडीगढ़ के पंचकुला में अंतिम संस्कार हुआ।
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आरआर भारद्वाज का जन्म वर्ष 1940 में रोहाना के प्रतिष्ठित त्यागी परिवार में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा मुजफ्फरनगर शहर में हुई और इन्होंने ग्रेजुएट एसडी डिग्री कॉलेज से किया। पोस्ट ग्रेजुएट लखनऊ से किया। 1963 में इनकी सेना में कैप्टन के रूप में नियुक्ति हुई। 1965 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में इन्होंने अपनी टुकड़ी का नेतृत्व किया। इस दौरान इन्हें दो गोली लगी, एक गोली कंधे में और दूसरी इनके घुटने में लगी। सैनिक अस्पताल में एक साल तक उपचार चला। इसी बीच इन्होंने आईएएस की तैयारी शुरू की और वर्ष 1968 में आईएएस में इनका चयन हो गया और इन्हें पंजाब प्रांत का कैडर मिला। आरआर भारद्वाज का विवाह जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन की भतीजी मीनाक्षी से हुआ। भारद्वाज के एक पुत्र और दो पुत्रियां है। पंजाब के मुख्य सचिव पद से ये वर्ष 2000 में ये रिटायर हुए। बाद में पंजाब सरकार ने इन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष भी बनाया। रामरतन पंचकुला रहते हैं और उनके परिवार के सदस्य मुजफ्फरनगर के रोहाना, शहर के नईमंडी और हनुमान चौक पर रह रहा है। भारद्वाज के भतीजे नवनीत भारद्वाज ने बताया कि रामरतन भारद्वाज लंबे समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थे। बीती रात 12.15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से रोहाना में शोक छा गया और उनके परिजन पंचकुला पहुंच गए। पंचकुला में उनका रविवार दोपहर में अंतिम संस्कार हुआ। उनके बेटे पुनीत भारद्वाज ने उन्हें मुखाग्नि दी।
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