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रोडवेज डिपो में ईटीआईएम कम, रोजाना एक लाख तक की चपत  

Sat, 24 Dec 2016 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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रोडवेज डिपो में ईटीआईएम कम पड़ गई हैं, इससे रोजाना कई गाड़ियों के पहिये थम रहे हैं। बसों का संचालन प्रभावित होने से विभाग को प्रतिदिन एक लाख से अधिक का नुकसान झेलना पड़ रहा है। घाटे और बसों के संचालन को रफ्तार देने को नई प्लानिंग की गई है। डिपो में नियमित और संविदा परिचालकों का ग्रुप बनाया गया है।
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इलेक्ट्रिक टिकट इश्सुयिंग मशीन (ईटीआईएम) को लेकर डिपो का बुरा हाल है। चालक-परिचालक बसों को नंबर पर लगाकर मशीन के लिए चक्कर लगा रहे हैं। स्थिति ऐसी बनी है कि लंबी दूरी की बसों को भी ईटीआईएम समय से उपलब्ध नहीं हो रही है। बृहस्पतिवार को करीब आधा दर्जन गाड़ियों को ईटीआईएम नहीं मिल सकी, जिसके चलते वह डिपो में ही खड़ी रही।

जो ईटीआईएम हैं तो वह परिचालकों को चार-पांच घंटे बाद मिल रही है। ऐसे में बस देरी से रवाना होने पर नाइट में चल रही है। लगातार स्टियरिंग पर बैठने से चालकों की सेहत पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। रोडवेज को भी ईटीआईएम की कमी के कारण रोजाना एक लाख से अधिक की चपत झेलनी पड़ रही है। 
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डिपो की आय को पटरी पर लाने के लिए विभाग ने प्लान बनाया है।  नियमित और संविदा परिचालकों का ग्रुप बनाया है। जिनको ईटीआईएम का वितरण सुबह ही होगा। विभाग ने 72 संविदा और 108 नियमित परिचालकों को ईटीआईएम देने का फैसला किया है। चिंता यह है कि डिपो में 78 अनुबंधित बसें हैं और 127 निगम की है।

टिकट मशीन की कमी के कारण निगम की टोटल 205 बसों के संचालन पर खतरा मंडरा गया है। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि बसों के संचालन पर ईटीआईएम कमी का असर पड़ रहा है। रोजाना इसकी शिकायत मिल रही है। निगम को ईटीआईएम उपलब्ध कराने को पत्र लिखा गया है।             

16 लाख प्रतिदिन इनकम            
डिपो की रोजाना आए का आंकलन किया जाए तो प्रतिदिन 200 से अधिक बसे संचालित होती है। जिनके माध्यम से एक दिन की आय करीब 16 लाख रुपये होती है, जो अब 14 से 15 लाख रुपये के बीच पहुंच गई है। डिपो में एक बस को कम से रोजाना 400 किमी तक दौड़ना होता है। मीडिल दूरी की 500 से 600 और लंबी दूरी की बस को दो दिन में 1000 से अधिक किमी का सफर करना होता है।             
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