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दंगा नियंत्रण की रिहर्सल में दौड़ी पुलिस, डर गए शहर के लोग    

Fri, 23 Jun 2017 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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दंगा रिहर्सल के लिए शहर में दौड़ते पुलिस के वाहन। - फोटो : अमर उजाला
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दंगा नियंत्रण स्कीम को चालू करने से पूर्व अफसरों की मौजूदगी में पुलिस ने इसका रिहर्सल किया। इस दौरान शहर के दर्जनों चौराहों पर लाठी-डंडों और हथियारों से लैस पुलिस दौड़ती नजर आई। अचानक भारी संख्या में पुलिस दिखी तो सकते में लोग नजर आए। इस दौरान अफसरों ने पुलिस टीमों को आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जमकर अभ्यास कराया।       
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जनपद में कई बार जरा सी बात पर हालात बेकाबू हो जाते हैं। मामला सांप्रदायिक हो तो स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। इसके लिए अफसरों ने दंगा नियंत्रण स्कीम के तहत एक नई पुलिसिंग जनपद में चलाने के लिए तैयार की है। बृहस्पतिवार दोपहर डीएम जीएस प्रियदर्शी, एसएसपी अनंत देव तिवारी और एसपी सिटी ओमवीर सिंह ने पुलिस को स्कीम के तहत रिहर्सल कराया।

इसके लिए शहर के तीनों थानों की पुलिस के अलावा सिखेड़ा, मंसूरपुर, रतनपुरी सहित नौ थानों का फोर्स शहर में बुलाया गया था। इस दौरान तैनात अधिकारी और अफसरों ने शहर के रामपुरी, खालापार, शिवचौक, नावल्टी चौक, प्रकाश चौक, हनुमान चौक, सर्राफा बाजार आदि जगहों पर दंगे की सूचना देकर पुलिस को दौड़ाया। तय जगह पर तय समय पर पहुंचने के लिए पुलिस कर्मचारियों को कड़ा पसीना बहाना पड़ा।
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दौड़ते पुलिसकर्मी बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट, एलबो गार्ड, बॉडी प्रॉटेक्टर आदि के अलावा लाठी-डंडों और आधुनिक हथियारों से लैस थे। शहर में अचानक भारी संख्या में पुलिस को दौड़ते देख बाजारों में खड़े लोग सकते में आ गए। बाद में रिहर्सल का पता चलने पर लोगों ने राहत की सांस ली।       

शहर को चार सेक्टरों में बांटा    
मुजफ्फरनगर। दंगा नियंत्रण स्कीम की रिहर्सल के बारे में एसपी सिटी ओमवीर सिंह ने जानकारी दी। बताया कि रिहर्सल के दौरान शहर के भीतर संवेदनशील और अति संवेदनशील 37 प्वाइंट्स बनाए गए थे। इसमें छह सीओ, नौ प्रभारी निरीक्षक, 50 उपनिरीक्षक, 19 हेड कांस्टेबिल और 540 सिपाही लगाए गए थे। बताया कि बड़ी घटनाओं में शहर की फोर्स को 15 मिनट में और देहात की फोर्स को 30 से 45 मिनट पर तय बिंदुओं पर पहुंचने के लिए कहा गया था। बड़े बवालों से निपटने के लिए पुलिस को इस तरह की स्कीम के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे पुलिस को हालात पर काबू करने में बहुत मदद मिलेगी।        

शहर में चौबीस घंटे तैनात रहेगी एक कंपनी सेना
जनपद में होने वाले सांप्रदायिक बवाल, हंगामे और दंगे आदि से निपटने के लिए पुलिस की मदद करने के लिए सेना की एक कंपनी स्थायी रूप से तैनात की गई है। शासन की ओर से सेना की एक कंपनी जिले के लिए रिजर्व रखी गई है। फिलहाल कंपनी का ठिकाना मेरठ होगा, जिसे बाद में मुजफ्फरनगर शिफ्ट किया जा सकता है। सेना के मेजर ने जनपद के आला अफसरों से मिलकर मामले की जानकारी दी। इस दौरान मेजर ने चार वर्ष पूर्व जिले में हुए सांप्रदायिक दंगे की जानकारी पुलिस से ली।  
    
वर्ष 2013 में जनपद में हुए सांप्रदायिक दंगे के बाद अक्सर देखने में मामूली बात पर बड़े बवाल होते रहे हैं। बवाल से निपटने के लिए कई बार पुलिस नाकाम रही है, जिसके चलते पुलिस पर हमले भी होते रहे हैं। शासन स्तर से इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास भेजी गई। केंद्र और प्रदेश सरकार ने मिलकर पुलिस की सहायता के लिए सेना की कंपनी जनपद को देने की तैयारी की। शासन के आदेश पर सेना के मेजर ने बृहस्पतिवार को जनपद पहुंचकर जिले के आला अधिकारियों से भेंट की।

मेजर ने बताया कि सेना की एक कंपनी को जनपद पुलिस की मदद  के लिए रिजर्व रखा गया है। कंपनी का काम मुजफ्फरनगर के लॉ एंड आर्डर को सही रखने के लिए पुलिस की मदद करना होगा। जिले में होने वाले बड़े बवाल, दंगे, जाम आदि के बाद बेकाबू हालात होने पर सेना की यह कंपनी जिला पुलिस की मदद करेगी। कंपनी को फिलहाल मेरठ में रोका गया है। बाद में इसे मुजफ्फरनगर शिफ्ट किया जा सकता है। सेना मेजर ने पुलिस से वर्ष-2013 में जनपद में हुए दंगों के बारे में जानकारी जुटाई।       

हथियारों से लैस रहेंगे 70 सैनिक      
मुजफ्फरनगर। सेना की जिस कंपनी को जनपद के लिए भेजा गया है। उसमें 70 सैनिक 24 घंटे हथियारों से लैस रहेंगे। अफसरों की एक कॉल पर कंपनी जनपद के लिए कूच करेगी। शहर में आने के बाद कंपनी के अफसर और जवान हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस की हरसंभव मदद करेंगे।       
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