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क्रांतिकारी स्वामी भीष्म की जयंती पर यज्ञ, सुनाए भजन

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मुजफ्फरनगर। स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक स्वामी भीष्म की 163वीं जयंती पर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि क्रांतिकारी स्वामी भीष्म ने स्वाधीनता और समाज सुधार के लिए जीवन समर्पित किया था।
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रविवार को सरकुलर रोड स्थित संतोष विहार में वैदिक संस्कार चेतना केंद्र पर भजनोपदेशक स्वामी भीष्म की जयंती मनाई गई। यज्ञ में आहुति देकर उनकी राष्ट्र सेवा का स्मरण किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि स्वामी भीष्म ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 65 भजन मंडली तैयार कर हरियाणा, पंजाब और यूपी में आजादी की अलख जगाई थी। पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों के खिलाफ उन्होंने समाज में वैदिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने 250 से ज्यादा भजनों की पुस्तकें लिखी। जनपद में लाल बहादुर शास्त्री, अलगू राय, वीतराग स्वामी कल्याणदेव के साथ ग्रामीण अंचल में सेवा कार्य किए। गाजियाबाद के करहेड़ा आश्रम में स्वामी जी ने क्रांतिकारियों को अंग्रेजों से छुपा कर रखा था। आनंद पाल सिंह आर्य, आरपी शर्मा, मंगत सिंह आर्य, मास्टर राजेंद्र प्रसाद, जनेश्वर प्रसाद आर्य, गजेंद्र सिंह राणा, यज्ञदत्त आर्य आदि ने स्वामी भीष्म के प्रसंग सुनाए। इस मौके पर स्वामी भीष्म के घरौंडा से पधारे वंशज आदित्य आर्य, बलवान सिंह सोलंकी आदि को आचार्य ने वैदिक साहित्य भेंट किया।
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