मुजफ्फरनगर। दिवाली पर आतिशबाजी के बीच सेहत के लिए सावधानी बरतना भी जरूरी है। पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस और अस्थमा रोगियों के लिए नुकसानदेय साबित हो सकता है। पटाखों में प्रयोग होने वाले विभिन्न केमिकल वातावरण को प्रदूषित कर देते हैं। दमा और सांस के रोगियों के लिए वायु प्रदूषण समस्या बन सकता है।
वायु प्रदूषण को लेकर एनसीआर क्षेत्र में एनजीटी की ओर से विशेष गाइड लाइन काफी पहले से लागू की गई हैं। बावजूद दिवाली में नियमों का उल्लंघन सांस और अस्थमा रोगियों पर भारी पड़ता है। ऐसे मरीजों को दीपावली में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
प्रदूषण से दूर रहें और मास्क लगाएं अस्थमा रोगी
जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ.योगेन्द्र त्रिखा का कहना है कि दिवाली पर वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। ऐसे में सांस और अस्थमा के रोगी विशेष सावधानियां बरतें। ऐसे रोगियों को प्रदूषण से दूर रहना होगा। जिसके लिए उन्हें मास्क पहनना जरूरी है। ऐसे रोगी घर के अंदर रहें और अपनी दवाएं साथ रखें।
इन विशेष सावधानियों का करना होगा पालन
- पटाखों के धुएं और प्रदूषण से दूर रहें।
- प्रदूषण बढने पर घर के भीतर ही हरें।
- घर से बाहर मास्क लगाकर ही जाएं।
- डाॅक्टर की बताई सभी दवाएं साथ रखें।
- फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने को योग करें।
आंखों की सुरक्षा को लगाएं चश्मा
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.रविन्द्र का कहना है कि आतिशबाजी या पटाखे जलाते समय इससे निकलने वाली चिंगारी या धुएं से आंखों को बचाने के लिए सुरक्षात्मक चश्मे पहनना महत्वपूर्ण है। चश्मे आंखों को उड़ने वाले मलबे, चिंगारी और आतिशबाजी में इस्तेमाल होने वाले रसायनों से बचाते हैं। आंखों में चमक लग जाए तो ठंडे पानी से धोएं।