मोरना। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में मंगल गीतों के साथ श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर वेद मंत्रों के साथ यज्ञ में आहुतियां दी र्गइं। भक्ति संगीत पर श्रद्धालु प्रभु प्रेम में मग्न होकर झूमे। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि गऊ, गंगा, गोपी, गीता और गायत्री भारतीय संस्कृति का आधार है।
श्री डोंगरे जी भागवत भवन में बाल कथा व्यास अचल शास्त्री ने कथा के अंतिम सत्र में प्रभु भक्ति का महत्व बताया। विधि विधान से व्यास पीठ के पूजन के बाद यज्ञशाला में राष्ट्र कल्याण, शांति और सद्भाव के लिए यज्ञ में भक्तिों ने पूर्ण आहुति दी। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा, गाय, गीता, गोपी और गायत्री से भूमंडल पर भारत की पहचान है। यह भारतीय संस्कृति का आधार है।
युवा पीढ़ी को गंगा की पवित्रता और उसकी महत्ता से अवगत कराना चाहिए। गोपी यानी नारी का जहां अपमान होता है, वहां लक्ष्मी का वास नहीं रहता। नारी, शक्ति और दुर्गा का रूप हैं। कथा में यजमान अजीत सिंह, पुष्पेंद्र कौशिक, विनोद गुप्ता, बाग सिंह, सतीश सक्सेना, दामोदर सिंह, राजकुमार शाक्या, अरविंद कुमार ने संतों का आशीर्वाद लिया। नीटू, विनय वर्मा, नाथीराम, ओमप्रकाश भाटी, कृष्णलाल अग्रवाल, मास्टर शिवचरण,एके सिरोही आदि का सहयोग रहा। भंडारे में बड़ी संख्या में तीर्थ के संतों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
रागी जत्थे का शबद कीर्तन
मुजफ्फरनगर (ब्यूरो)। शहर के पंचायती गुरुद्वारा पंचदरा समिति सर्राफा बाजार के तत्वावधान में मंगलवार को गुरुनानक देव महाराज का प्रकाश उत्सव भगत सिंह रोड सब्जी मंडी के सामने ट्रंक मार्केट पंडाल में मंगलवार रात मनाया गया।
महान कीर्तन दरबार में बाबा बुढ्ढा साहिब गुरुद्वारा के जत्थेदार देवेंद्र सिंह और रुड़की रोड गुरुद्वारे के रागी जत्था और बीबीयों के जत्थे ने शब्द कीर्तन कर संगतों को निहाल किया। राजौरी गार्डन दिल्ली से आए रागी जत्था साहब भाई परमजीत सिंह खालसा ने कीर्तन द्वारा गुरुनानक जी के जन्म, उनके द्वारा किया गया सच्चा सौदा, पवित्र काबा जी का दृष्टांत और गुरु ग्रंथ साहिब में समावेश और बाबा फरीद की वाणी पर प्रकाश डालते हुए संगतों को निहाल कर दिया। ज्ञानी राजबीर सिंह ने अरदास के बाद गुरु का वाक किया। मुख्य अतिथि अब्दुस्समी को सरोपा से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में ज्ञानी गुरुबचन सिंह, प्रतिपाल सिंह कथूरिया, सुरेंद्र वर्मा, राजेंद्र वाधवा, सरदार दलजीत सिंह एडवोकेट, गौरव धवन, वजीर सिंह, हरजिंदर सिंह आदि रहे। संचालन खालस दल के जिला प्रधान सरदार सतनाम हंसपाल ने किया।