संविदा सफाईकर्मी की भर्ती में गैर वाल्मीकि समाज के लोगों की भर्ती नहीं होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर सफाई कर्मचारी संघ ने टाउन हाल में बैठक की। सड़क पर उतरकर जुलूस निकाला और कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम डीएम को ज्ञापन दिया।
मुख्यमंत्री के भेजे ज्ञापन में सफाई कर्मचारी संघ ने कहा कि वाल्मीकि समाज युगों से सफाई का कार्य कर रहा है। 60 साल पहले घरों से कच्चा मैला ढोने का काम भी इसी समाज के लोग करते थे। ठेका प्रथा के अंतर्गत वाल्मीकि समाज के नवयुवक पूरे वर्ष सभी त्योहारों पर नालों की सफाई और अन्य कार्य ठेके पर करते हैं।
आज तक सामान्य और पिछड़ी जाति के किसी भी व्यक्ति ने ठेके पर सफाई कार्य नहीं किया है। रमजान और कांवड़ यात्रा में सफाई का कार्य और बकरीद पर जानवरों की अंतड़ी आदि उठाने का कार्य यही समाज करता आया है। सड़कों से मरे हुए जानवर इसी समाज के लोग उठाते हैं। शासन से आई भर्ती में सफाईकर्मी की नौकरी में अन्य समाज के लोगों को भी जोड़ा गया है। अन्य जाति के लोगों से एक वर्ष तक ठेेके पर रखकर काम कराकर देखिए हमें नौकरी पर रखने में आपत्ति नहीं होगी।
वाल्मीकि समाज को भी कुम्हारों, मछुआरों, धोबियों की तरह सफाई कार्य पर पूर्ण अधिकार दिया जाए। सफाई कर्मचारी संघ से जुड़े वाल्मीकि समाज के लोग पहले टाउन हाल में एकत्र हुए, यहीं से सभा के बाद जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचे। कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन कर डीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। इ
स अवसर पर राजाराम शास्त्री, कस्तूर सिंह स्नेही, कुल्लनदेवी, राजू वैद्य, देवीदास पहलवान, मुन्ना प्रधान, हरफूल, नरेश मेहरोल, श्यामलाल बेेनीवाल, राजकुमार, रामकिशोर खतौली, राधेश्याम, रामभरोसे बुढ़ाना, रमेश पुरकाजी, रविंद्र भोकरहेड़ी, सुनील मेहरा जानसठ, शैलेंद्र चरथावल आदि ने विचार रखे। ज्ञापन प्रधानमंत्री, सफाई कर्मचारी आयोग, एससी एसटी आयोग, राज्यपाल को भी भेजे गए।