मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव हत्याकांड में सातों अभियुक्तों को अदालत ने पुख्ता साक्ष्यों, वादी की मजबूत पैरोकारी तथा हत्या के वीभत्स तरीके की वजह से दोषी माना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पत्थर, सरिये और लाठी डंडों के बेहिसाब जख्मों ने भी घटना की बर्बरता जाहिर की। अदालत में करीब पांच साल चली सुनवाई के दौरान मामले में दोनों पक्ष की तरफ से 16 गवाहों की गवाही हुई।
कवाल कांड में अपर सत्र न्यायाधीश हिमांशु भटनागर की कोर्ट संख्या-सात ने सचिन और गौरव के कत्ल में जिन सात अभियुक्तों को दोषी करार दिया है, उनके खिलाफ केस में वादी पक्ष की इंसाफ के लिए पैरवी भी मुख्य वजह है। गौरव के पिता रविंद्र सिंह ने 27 अगस्त, 2013 को दोपहर 2.45 पर जानसठ कोतवाली में इस दोहरे हत्याकांड की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मृतकों का पोस्टमार्टम तीन डाक्टरों के पैनल ने किया था। एसआई शाहिद अली ने उनका पंचनामा भरा था। घटना के समय जानसठ के प्रभारी निरीक्षक रहे शैलेंद्र शर्मा ने केस की विवेचना शुरू की।
उसके बाद एसआईसी के विवेचक संपूर्णानंद तिवारी ने हत्याकांड की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। 15 अप्रैल, 2014 को चर्चित केस में कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया। कवाल निवासी मुजम्मिल एवं मुजस्सिम, फुरकान, जहांगीर, नदीम, मृतक शाहनवाज, अफजाल और इकबाल पर हत्या के मुकदमे का परीक्षण हुआ। वादी पक्ष के 10 तथा बचाव पक्ष के छह गवाह पेश हुए। सरेआम वीभत्स तरीके से मारे गए सचिन और गौरव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिल दहलाने वाली थी।
डाक्टरों के पैनल को सचिन के शरीर पर 17 तथा गौरव के जिस्म पर 15 निर्मम हत्या के घाव मिले। गोली और धारदार हथियार का हत्यारोपियों ने कोई प्रयोग नहीं किया था, बल्कि लाठी-डंडों, सिर और मुंह को पत्थरों से कुचलने के साथ सरिये से मार-मारकर मौत के घाट उतार दिया था। कई जख्मों में मल्टीपिल घाव मिले थे। पीएम रिपोर्ट पुख्ता साक्ष्य साबित हुआ। वारदात में दूसरे पक्ष के मृतक शाहनवाज के पिता सलीम का अदालत में दिया बयान भी नामित आरोपियों को संदेह को दायरे में ले आया।
सलीम ने जो कोर्ट में बयान दिया था, उसमें सचिन और गौरव की कवाल में मौजूदगी दिन के 12 बजे दिखाई थी। वादी पक्ष की ओर से कोर्ट में भारतीय इंटर कॉलेज नंगला मंदौड़ के शिक्षक दिनेश कुमार की गवाही कराई गई। उनके मुताबिक कक्षा 12 का छात्र गौरव घटना के दिन 12.30 बजे तक क्लासरूम में था। थाने की पैरोकारी भी अहम रही। पुलिस ने मुजस्सिम से लोहे की रॉड और नदीम, जहांगीर और फुरकान से लाठी की बरामदगी दिखाई थी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त सामान को कोर्ट में प्रस्तुत किया। वीभत्स तरीके से की गई हत्या ने भी कातिलों को सजा का दोषी बना दिया।
एसआईसी ने दी थी क्लीनचिट, कोर्ट ने ठहराया दोषी
मुजफ्फरनगर। केस में हाईकोर्ट से जमानत पाए अफजाल और इकबाल पुत्र बुंदू भी कातिल ठहराए गए। वादी रविंद्र ने रिपोर्ट दर्ज कराते वक्त अफजाल को इकबाल का पुत्र लिखवा दिया था। एसआईसी ने इसी आधार पर मुकदमे से उनके नाम निकाल दिए थे। कोर्ट में गौरव के पिता रविंद्र के बयान ने स्पष्ट किया कि अफजाल और इकबाल सगे भाई हैं। सचिन के पिता बिशन सिंह के भी कोर्ट में बयान हुए, तो दोनों को कोर्ट ने धारा सीआरपीसी 319 में तलब कर जेल भेजा था। दोषी ठहराए जाने केे बाद दोनों फिर से कारागार में भेज दिए गए हैं।
हत्याकांड क्रूरतम , मृत्युदंड भी दे सकती है कोर्ट: जिंदल
मुजफ्फरनगर। वादी पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने कहा कि कवाल कांड में सचिन और गौरव की क्रूरतम तरीके से हत्या की गई थी। यह घटना मुजफ्फरनगर दंगे का कारण बनी, जिसमें 65 से ज्यादा बेगुनाहों की मौत हो गई। केस में दोषी कातिलों को न्यूनतम आजीवन कारावास की सजा के अलावा मृत्युदंड भी दिया जा सकता है।
डीएम ने ली कोर्ट के निर्णय की पल-पल की जानकारी
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड के मुकदमे में फैसला आने की पल-पल की जानकारी डीएम राजीव शर्मा लेते रहेे। फिलहाल डीएम जिले से बाहर प्रयागराज में है। उन्होंने डीजीसी से कोर्ट के निर्णय पर कई बार वार्ता की।
बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल को वीसी से दिया दोषी करार
मुजफ्फरनगर। बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल उर्फ बिल्ला को वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) के जरिये दोषी करार दिया गया। मुजफ्फरनगर जिला कारागार के वार्डन मथुरा निवासी चुन्नी लाल शर्मा हत्याकांड विक्की गैंग के इशारे पर अंजाम दिया गया था। उस वारदात में मुजम्मिल आरोपी है। आठ फरवरी को सजा के दिन एडीजे कोर्ट संख्या सात ने उसे तलब किया है।