लुधियाना से कच्चा माल लाकर छोटे बच्चों के गर्म कपड़े सीलकर तैयार कर बेचने का व्यापार यहां धड़ाम हो गया है। सदर बाजार में 200 से अधिक दुकानदारों के सीजन का पीक समय संकट में पहुंच गया है। शहर और आसपास के 20 किमी के दायरे में हजारों गरीब महिलाएं रेडीमेड कपड़े सिलने का काम करती हैं, इन महिलाओं के सामने भी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
मुजफ्फरनगर में लोहा उद्योग पर संकट के बादल छाने के बाद बहुत बड़ी संख्या में गरीब परिवारों की रोजी-रोटी यहां रेडीमेड कपड़ों से जुड़ गई है। छोटे बच्चों के गर्म कपड़े तैयार कर बेचने की यहां बड़ी मंडी बन गई है। उत्तर भारत के विभिन्न प्रांतों में यहां तैयार कपड़ा जा रहा है। कच्चा माल पंजाब के लुधियाना से आता है। मुजफ्फरनगर शहर के गरीब परिवारों और आसपास 20 किमी तक के गांवों में रेडीमेड कपड़ा तैयार होता है।
इससे हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। नोटबंदी से लुधियाना से अचानक कपड़ा मिलना बंद हो गया है। सदर बाजार में व्यापारियों के यहां तैयार माल फंस गया है। ऐसे हालात में इस व्यापार से जुड़े सभी लोगों की जिंदगी मानो थम सी गई है। सीजन का पीक समय होने के कारण दुकानों में माल भरा पड़ा है।
जिन लोगों ने सिलाई की है, दुकानदार उन्हें उनकी रकम देने की स्थिति में नहीं हैं। अचानक व्यापारियों के सामने आए संकट से पूरा बिजनेश प्रभावित हो गया है। रेडीमेड गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बिजेंद्र गोयल का कहना है कि स्कूलों की बच्चों की ड्रेस तक नहीं बिक पा रही है। बच्चों को पैसे के अभाव में ठंड में स्कूल जाना पड़ रहा है। बाजार में मंदी छा गई है। ग्राहक ढूंढे दिखाई नहीं दे रहा है। सीजन में सभी व्यापारियों का तैयार माल भी फंस गया है।