स्टॉक की खाद्य सामग्री खा गए चूहे
मुजफ्फरनगर। करीब डेढ़ माह के कोरोना कर्फ्यू ने होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को भी तोड़कर रख दिया है।
हर होटल ओर रेस्टोरेंट संचालक अपने यहां करीब एक सप्ताह का अतिरिक्त स्टॉक रखता है, जिसमें आटा, चावल, दालें और मसालों के साथ ही आलू-प्याज जैसी सब्जियां भी शामिल होती हैं। करीब डेढ़ माह पूर्व अचानक कोरोना कर्फ्यू लागू होने से होटल-रेस्टोरेंट संचालक अपने स्टॉक को क्लीयर नहीं कर पाए, जिससे इस अवधि में उनका पूरा स्टॉक चूहों ने कुतरकर नष्ट कर दिया। वहीं, कोरोना कर्फ्यू की अवधि की जानकारी न मिलने के कारण स्टाफ व लेबर को भी रोकना पड़ा, जिनका इस पूरे समय तनख्वाह के साथ ही खाने व ठहरने का खर्च भी इन संचालकों को ही भुगतना पड़ा है। अब होटल-रेस्टोरेंट खुलने की अनुमति तो मिली, लेकिन बैठाकर खाना न खिला पाने और विभिन्न कार्यक्रमों में महज 25 लोगों की मौजूदगी के नियम से इन्हें राहत नहीं मिल पा रही है। ऐसे में होटल-रेस्टोरेंट संचालक अब शासन से कार्यक्रमों में कम से कम सौ लोगों की मौजूदगी व बिजली बिल माफ किए जाने की मांग कर रहे हैं।
अलंकार मार्केट स्थित महादेव दाना-पानी रेस्टोरेंट के संचालक मुकेश शर्मा का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू के दौरान स्टॉक या तो चूहे कुतर चुके हैं या फिर वह खराब हो चुका है। अब शासन से यही गुजारिश है कि जल्द से जल्द पाबंदियों को हटाया जाए, जिससे कारोबार भी पटरी पर आ सके।
कंपनी बाग स्थित मधुबन रेस्टोरेंट संचालक गौरव का कहना है कि लेबर खर्च के साथ ही स्टॉक खराब होने से उन्हें मोटा नुकसान हुआ। कोर्ट रोड स्थित मां शाकंभरी रेस्टोरेंट के संचालक प्रदीप त्यागी का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू के दौरान रेस्टोरेंट बंद रहा। काफी नुकसान हुआ है। उधर, कोर्ट रोड के ही जय शिव शुद्ध भोजनालय संचालक राकेश कुमार का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू के दौरान लेबर को रोककर उनके खर्च वहन करना सबसे भारी रहा। इसके साथ ही बिजली बिल में भी किसी तरह की रियायत नहीं मिली, जो कारोबार पर अतिरिक्त मार है।
शहर के रुड़की रोड स्थित मारवाड़ी भोज के संचालक अश्वनी वर्मा का कहना है कि उन्हें कोरोना कर्फ्यू के दौरान स्टॉक खराब होने व लेबर रोककर रखने से करीब चार लाख रुपये का नुकसान हुआ है।