किन धाराओं में कितनी सजा?
अदालत ने दोषियों को निम्न धाराओं में सजा सुनाई-
धारा 120-बी : डेढ़ वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड।
धारा 180 : तीन महीने का कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड।
धारा 211 : एक वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड।
धारा 218 : डेढ़ वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड।
शस्त्र अधिनियम की धारा 25 : डेढ़ वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड।
क्या था पूरा मामला?
एक अक्तूबर 1994 को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान रामपुर तिराहा पर आंदोलनकारियों की बसों की जांच के दौरान तत्कालीन झिंझाना थाना प्रभारी बृज किशोर और अन्य पुलिसकर्मियों ने तमंचे तथा खुखरी बरामद होने का मामला दर्ज कराया था।
बाद में मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई। जांच के दौरान बरामद बताए गए हथियारों और कारतूसों की फोरेंसिक जांच कराई गई, जिसमें पाया गया कि भेजे गए कारतूस उन हथियारों से नहीं चलाए गए थे। इसके बाद फर्जी बरामदगी का मामला दर्ज किया गया।
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तीन आरोपी हुए दोषी, एक की हो चुकी है मौत
इस मामले में प्रारंभिक रूप से चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान आरोपी कमल किशोर का निधन हो गया। इसके बाद बृज किशोर, अनिल कुमार और उमेश कुमार के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई जारी रही और अब अदालत ने तीनों को दोषी करार देते हुए सजा सुना दी।
अन्य मामलों की भी चल रही सुनवाई
रामपुर तिराहा कांड से जुड़े अन्य मामलों में भी अलग-अलग स्तर पर सुनवाई जारी है। इससे पहले 18 मार्च 2024 को एक अन्य पत्रावली में फैसला आ चुका है। वहीं अन्य लंबित मामलों में भी सीबीआई अदालत में सुनवाई चल रही है।
उत्तराखंड आंदोलन का चर्चित मामला
रामपुर तिराहा कांड उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सबसे चर्चित मामलों में गिना जाता है। इस घटना में कई आंदोलनकारियों की जान गई थी और इसके बाद दर्ज विभिन्न मामलों की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी। वर्षों बाद भी इससे जुड़े कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी है।