उत्कल एक्सप्रेस हादसे में मारे गए एक रेलयात्री की शनाख्त पर पेच फंस गया है। मरने वाले यात्री के हाथ पर रामप्रकाश लिखा हुआ था, जबकि भिंड से आए कुछ लोगों ने उसकी शनाख्त अमर सिंह के रूप में की। उन्होंने अमर सिंह के प्रमाण तो दिए लेकिन रामप्रकाश ही अमर सिंह है, यह साक्ष्य नहीं दे पाए। इसके चलते जीआरपी अभी तक उसे अज्ञात ही मान रही है और उसकी अस्थियां भी कथित परिवारीजनों को सौंपने से इंकार कर दिया। जीआरपी ने परिजनों के बताए गांव में जांच कर सही स्थिति स्पष्ट करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस से संपर्क किया है साथ ही परिवारीजनों से डीएनए सैंपल मांगा है।
शनिवार को खतौली में पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस खतौली में पलट गई थी। हादसे में 23 यात्रियों की मौत और सैकड़ों घायल हुए थे। 22 लोगों की पहचान हो गई थी, जबकि एक व्यक्ति का जीआरपी ने अज्ञात में अंतिम संस्कार कर दिया था। रविवार को मध्यप्रदेश के जिला भिंड के गांव कुनीपुरा निवासी गंगा सिंह दास और बनवारी ने मृतक रामप्रकाश साधु की पहचान अपने भाई के रूप में की। गंगादास ने बताया कि मृतक उनका भाई अमर सिंह उर्फ रामप्रकाश दास था।
उसने गृहस्थी त्याग कर साधु का जीवन अपना लिया था। 18 अगस्त को ग्वालियर से उत्कल एक्सप्रेस में सवार हुआ था। वह सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में गंगा स्नान करने जा रहा था। जीआरपी उनके इस दावे से सहमत नहीं है। जीआरपी का कहना है कि उन्होंने जो साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं, उनमें कहीं भी रामप्रकाश दास का जिक्र नहीं है। सभी प्रमाणपत्रों में नाम अमर सिंह है, जबकि यात्री ने अपने दाहिने हाथ पर नाम रामप्रकाश गोदवाया हुआ था।
जीआरपी ने कथित परिजन गंगादास, बनवारी दास को मृतक की अस्थियां देने से भी इंकार कर दिया है। अमर सिंह या रामप्रकाश दास दोनों एक ही व्यक्ति के नाम हैं। मृतक के शरीर से लिए गए डीएनए सैंपल का मिलान कथित परिवारीजनों से किया जाएगा। मिलान के बाद ही उसे अमर सिंह उर्फ राम प्रकाश दास माना जाएगा। जीआरपी एसओ किशन अवतार सिंह ने बताया कि अभी तक मृतक राम प्रकाश की पहचान पुष्ट नहीं हो सकी है। कुछ लोगों ने दावा किया है, जिनसे सबूत और डीएनए सैंपल मांगा गया है। सभी तथ्यों को जांचने के बाद ही आगे की कार्रवाई हो सकेगी।
मुआवजा के लिए तो नहीं खेल
मुजफ्फरनगर। उत्कल हादसे में मृतकों के परिजनों को रेलवे बोर्ड ने मुआवजा देने की घोषणा की है, जिसके लिए रामप्रकाश दास की पहचान की गई हो, जीआरपी सभी तथ्यों को लेकर जांच कर रही है। जीआरपी का तर्क है कि यदि अमर सिंह ही राम प्रकाश दास था, तो उसके गृहस्थ जीवन का कोई साक्ष्य क्यों नहीं है। परिजनों से इन सब बातों को लेकर पूछताछ की गई है, लेकिन अभी तक जीआरपी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
बुरी हालत में था शव
मुजफ्फरनगर। उत्कल हादसे में मृतक राम प्रकाश का शव बुरी हालत मेें था। उसका चेहरा बिल्कुल क्षत-विक्षत अवस्था में था। ऐसे में माना जा रहा है कि राम प्रकाश ट्रेन में खिड़की के नजदीक रहा होगा। हादसे में बोगियां पलटी तो वह उनके नीचे दब गया। जीआरपी ने उसके मृत के चित्रों को परिजनों के सामने रखे हैं, जिन्हें देखकर परिजन कोई जवाब नहीं दे सके।