मोरना(मुजफ्फरनगर)। मानस मर्मज्ञ मोरारी बापू ने कहा कि मां की करुणा निःस्वार्थ होती है। अपने बच्चों से प्रेम करने को माता को किसी कारण या स्वार्थ की आवश्यकता नहीं होती है। मां अपनी संतान की भलाई और खुशी को अपना सर्वस्व न्योछावर कर देती है, इसलिए मां वंदनीय और पूजनीय है। भगवान राम ने रावण का वध करने के लिए कुल 31 बाणों का प्रयोग किया, जिससे रावण का वध हुआ।
भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में प्रवासी भारतीय चेतन भाई के पुत्र बृजेश की स्मृति में आयोजित राम कथा में मोरारी बापू ने कहा कि सब निरंतर राम नाम का जाप करें। जब किसी इंसान का एकांत बिगड़ता है, तो उसके भीतर का संतुलन, शांति और मानसिक स्पष्टता डगमगा जाती है। संयमित जीवन जीने से हमारे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन में गहरा और स्थायी संतुलन बनता है।
प्रत्येक व्यक्ति में देश प्रेम और देश भक्ति की भावना होनी चाहिए। हम अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज की भलाई के लिए कुछ करें। जो भगवान को अपना लेता है, उसे भगवान भी अपनाते हैं। भगवान के लिए कोई अपना कोई पराया नहीं है। भगवान सबके हैं और सब में भगवान हैं। रावण के अंत्येष्टि संस्कार के बाद प्रभु श्री राम ने विभीषण का राजतिलक किया।
यथाशीघ्र भगवान अयोध्या की ओर पधारे। गुरु वशिष्ट ने राम का राजतिलक किया और अयोध्या का राजा घोषित कर दिया। भगवान श्री राम ने अपने शासनकाल में बिना किसी भेदभाव के हर प्राणी को प्रेम, न्याय और सुरक्षा का सहारा दिया। आज के काम को कल पर टालना ठीक नहीं है।
कल कभी नहीं आता, इसीलिए जो करना है आज ही शुरू करें। कथा विवाद नहीं चाहती है। कथा संवाद चाहती हैं। जब तक सूर्य, चंद्रमा और गंगा है, तब तक भारत में राम कथा की धारा बहती रहेगी। तीर्थ की सुंदरता ही हम सब की पहचान है। कर्मयोगी परम संत कल्याण देव महाराज के कर्म के कारण ही भागवत भूमि का गौरव राष्ट्र और विश्व ने जाना है।
कथा के बाद बापू का कारवां गंगा घाट कुटी कैलाश पहुंचा। मानस मर्मज्ञ ने मुख्य यजमान चेतन भाई एवं परिजनों को आशीर्वाद दिया। कथा सहयोगी कार्यकर्ताओं को प्रसाद और शॉल भेंट किए। कुटी में पूजा अनुष्ठान के मुरारी बापू समनदास आश्रम के पास बने हेलीपैड पधारे और भक्तों का प्रणाम लेकर हेलीकॉप्टर से देहरादून चले गए। प्रदीप जिंदल, अरविंद पिंकी, जेके गर्ग, सर्वेश अग्रवाल, पवन खटाना, नवनीत, राजेश, मुरली, यशवंत, धीरज, त्रिपाल सिंह का सहयोग रहा।
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लोगों को खूब भाए गुजराती व्यंजन
मोरना। राम कथा सेवा समिति की ओर श्री शुकदेव आश्रम में नौ दिनों तक भंडारे की व्यवस्था रखी गई। ट्रस्टी ओमदत्त देव ने बताया कि शुकदेव संस्कृत विद्यालय, तिलकधारी आश्रम में भी व्यवस्था रही। कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री ने बताया कि गुजराती व्यंजनों का स्वाद सबको पसंद आया।
अक्षय वटवृक्ष पर बांधे गए मन्नतों के धागे
मोरना। राम कथा के समापन पर देश के अनेकों राज्यों से आये भक्तों ने सिद्ध अक्षय वट पर मन्नत के धागे बांधे और पूजन किया। श्री शुकदेव मंदिर, हनुमतधाम, गणेश धाम, नक्षत्र वाटिका में भीड़ रही। पुरोहित सुमन कृष्ण शास्त्री, आचार्य अरुण ने बताया कि अक्षय वट के नीचे बैठकर श्रद्धालुओं ने पाठ किया। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द महाराज से आशीर्वाद लिया। कथा व्यवस्था में ठाकुर प्रसाद, आचार्य युवराज, दीपक मिश्रा का सहयोग रहा।
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बापू के साथ रामकथा में रम गई जिंदगी
(फोटो )
मोरना। शुकतीर्थ में रामकथा सुनने के लिए गुजरात के गांधी नगर निवासी प्रोफेसर दीप्ति पांडेय ने छह वर्ष पहले नौकरी छोड़ी और आध्यात्म से जुड़ गईं। वह जब हाईस्कूल में थी, दादी के साथ कथा यज्ञ में जाती थी। वह बीते 26 वर्ष से देश-विदेश में मानस मर्मज्ञ की कथाएं सुन रही है।
सूरत की गृहणि तोरल अपनी मां कमला के साथ आई। कहती है कि सिद्ध अक्षय वट के नीचे भागवत पढ़ने से सुखद शांति मिली। हैदराबाद से पहुंची शिल्पा गोयल हिंदी की शिक्षिका है। वह दस साल से बापू की राम कथा का श्रवण करती है। उनकी धार्मिक यात्रा में गहन रुचि है। पत्नी सुखी के संग मुंबई से आये प्रेम सिंह व्यवसायी है। उनका कहना है कि दो दशक से राम कथा सुन रहे है। बापू की वाणी धर्म के मर्म को समझाती है।
साउथ दिल्ली से आई मनीषा उधमी कहती हैं कि बचपन से राम कथा सुनती हैं। बापू चुंबक की तरह भक्तों को खींचते हैं।
शुकतीर्थ में रम गए हाई-टेक सतुआ बाबा
(फोटो)
मोरना। विष्णु स्वामी संप्रदाय की सतुआ बाबा पीठ के पीठाधीश्वर संतोष दास उर्फ संतोष तिवारी मानस मर्मज्ञ मुरारी बापू के स्नेही युवा संत हैं। 11 साल की उम्र में सौ रुपये लेकर उन्होंने घर त्याग दिया और आध्यात्म की राह पकड़ ली। काशी में मणिकर्णिका घाट पर इनका आश्रम है। प्रयाग में माघ मेला में महंगी कारों से चर्चा में आए, जबकि शुकतीर्थ में वे बिल्कुल अनजान बने राम भक्ति में डूबे नजर आए। सतुवा बाबा कहते हैं कि बापू की राम कथा का श्रवण उन्हें आध्यात्म की ऊर्जा देता है। चार जुलाई से हरिद्वार में मुरारी बापू की राम कथा होगी, वहां भी वह पहुंचेगे।
शुकदेव आश्रम में श्रीराम कथा सुनते संत श्रद्धालु। संवाद
शुकदेव आश्रम में श्रीराम कथा सुनते संत श्रद्धालु। संवाद
शुकदेव आश्रम में श्रीराम कथा सुनते संत श्रद्धालु। संवाद
शुकदेव आश्रम में श्रीराम कथा सुनते संत श्रद्धालु। संवाद