मुजफ्फरनगर। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के कुलपति एवं पद्मश्री प्रोफेसर रविकांत वर्मा ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्चस्तरीय बनाने के लिए यूनाइटेड किंगडम (यूके) मेडिकल यूनिवर्सिटी से फैकल्टी एक्सचेंज एग्रीमेंट किया जाएगा। नीट से देश को योग्य चिकित्सक मिलेंगे।
प्रो रविकांत वर्मा ने नई मंडी के संजय मार्ग स्थित अपने आवास पर बातचीत में कहा कि नीट से देश में मेडिकल की गुणवत्ता बढ़ेगी। योग्यता के अनुरूप मेरिट से ही एमबीबीएस और पीजी में चयन होगा। प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा में उच्चस्तरीय सुधार के लिए यूके से फैकल्टी एक्सचेंज एग्रीमेंट किया जाएगा। वेस्टन सुपर मेयर, स्कॉटलैंड, वेल्स आदि की यूनिवर्सिटी में नए विषयों को सीखने के लिए चिकित्सा शिक्षक जाएंगे, ताकि सूबे में उच्च चिकित्सा कल्चर स्थापित हो सके।
युवाओं को कैरियर काउंसलिंग से नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। क्षमता और योग्यता के अनुसार ही व्यवसायिक शिक्षा का चयन करें। जब माता-पिता की उम्मीदें बच्चे की योग्यता से मेल नहीं खाती, तभी आत्महत्या जैसे मामले बढ़ते है। वर्तमान इंटरमीडिएट एजूकेशन व्यवसायिक शिक्षा के कम्पीटिशन की दृष्टि से कमजोर है। आईआईटी, एमबीबीएस को ही कैरियर के लिए अंतिम मुकाम नहीं माने, दुनिया में फिलहाल नए क्षेत्रों में प्रतिभाओं की जरूरत है।
बीडीएस के प्रति युवा में कम क्रेज के सवाल पर वर्मा ने कहा कि पीजी (एमडीएस) सीटो की कमी और जॉब उपलब्धता नहीं होने की वजह से अरुचि बढ़ी है। महानगरों की अपेक्षा छोटे शहरों में दांतों के रोगों के प्रति जागरूकता की कमी है। हार्ट, किडनी, लीवर, ब्रेन आदि की बीमारियों से बचाव को खर्च कर लेते हैं, दांतों के लिए नहीं। जबकि दांतों का स्वस्थ रहना बहुत सी बीमारियों से बचाव है।
प्रदेश में आबादी के लिहाज से अधिक मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। चिकित्सा क्षेत्र में विशेषज्ञों की डिमांड है। रोग निवारण में योग एवं आयुर्वेद की अहम भूमिका है। इसके लिए केजीएमयू में अलग से आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था शुरू की गई है। हालांकि पद्धतियों को लेकर भ्रांति नहीं होनी चाहिए।
केरल मॉडल से होगाकुपोषण पर नियंत्रण
मुजफ्फरनगर। केजीएमयू से यूजी और पीजी कर आज वहीं के वीसी का दायित्व निभा रहे चांदपुर गांव के मूल निवासी प्रोफेसर रविकांत वर्मा कहते हैं कि प्रदेश में कुपोषण पर नियंत्रण के लिए केरल मॉडल अपनाना होगा। महिला शिक्षा बढ़ेगी, तभी कुपोषण से बचाव होगा। केरल की महिलाओं ने साक्षरता के जरिए देश और विदेश तक साइंटिफिक जॉब हासिल किए है। सूबे के कई जिलो बहराइच, बस्ती आदि में अफ्रीका जैसे हालात हंै।