जितनी तेज रफ्तार, उससे अधिक भोले बाबा की भक्ति का जुनून। भजनों की बेला और हाथों में गंगाजल और नियमबद्ध छड़ी लेकर डाक कांवड़िये अपने शिवालयों की ओर बढ़े। कोई नौकरी, कारोबार बेहतर चाहता है तो कोई परिवार की सुख-समृद्धि के लिए बाबा की भक्ति में डुबकी लगा रहा है। सबसे कम समय वाली डाक कांवड़ लंबी दूरी में हरियाणा-पानीपत की रही। बाबा के भक्तों ने हरिद्वार से गंगाजल लेकर 21 घंटे 7200 सेकेंड में सफर पूरा करना लक्ष्य रखा है।
बृहस्पतिवार को पूरी तरह से डाक कांवड़ियों का जोर रहा। स्थानीय क्षेत्रों के भी शिवभक्त कांवड़िये निकले। डाक कांवड़िय़ों का जुनून देखते ही बनता था। धूप की परवाह न गर्मी का डर, भक्तों ने भोले बाबा के लिए खूब दौड़ लगाई। हरियाणा के हिसार से डाक शिव डाक कांवड़ सेवा समिति तीसरी विशाल कांवड़ लाए हैं। जत्थेदार रमेश पौखरियाल ने कहा कि अच्छी नौकरी लगने पर बाबा के लिए डाक कांवड़ लाने की मन्नत मांगी थी। उसकी पहली डाक कांवड़ है।
रफ्तार से भागने पर कई जगह दिक्कत भी हुई, मगर बाबा का नाम लेकर सब खत्म हो गई। दिल्ली के जौली क्षेत्र से डाक कांवड़ लाने वाले बम-बम कांवड सेवा के अनिल ने कहा कि वह पांचवीं बार डाक कांवड़ लाया है। इस बार गोमुख से दिल्ली अपने शिवालय तक 24 घंटे और 30 मिनट में समय पूर्ण करना का लक्ष्य रखा गया था। सेवा में 18 सदस्यों का दल है, जो बारी-बारी से बाबा की भक्ति में दौड़ लगा रहा है। वहीं, हाईवे पर बिना साइलेंसर की बाइक लेकर कांवड़िय़ों ने दौड़ लगाई है। जिससे बाइक की आवाज बुलेट जैसी निकलने के साथ एवरेज पर भी प्रभाव पड़ा है।
मां ने बनाया चूरमा ...तने खाना पड़ेगा
मुजफ्फरनगर। यूं तो ढेरों भजन कांवड़ मेले में लोकप्रिय रहते हैं। इस बार मुख्य रूप से मेरी मां ने बनाया भोले चूरमा, तने खाना पड़ेगा, खासा चर्चित रहा है। हर तीसरी डाक कांवड़ पर यही भजन बजता हुआ शहर से निकला। इसके अलावा कई अन्य परंपरागत भजनों, गीतों से भी कांवडिय़ों ने मनोरंजन किया। ृ