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शायरों ने कलाम पेश कर वाहवाही बटोरी

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मुशायरे में कलाम पढ़ते शायर काशिफ अख्तर - फोटो : DEVBAND
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शायरों ने कलाम पेश कर वाहवाही बटोरी
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देवबंद। अल्लामा शब्बीर अहमद उस्मानी चैरिटेबल एवं वेलफेयर ट्रस्ट के बैनर तले मौलाना आमिर उस्मानी के 100वें जन्मदिवस पर मुशायरे का आयोजन हुआ। जिसमें शायरों ने उम्दा कलाम पेश कर श्रोताओं की जमकर दाद बटोरी।
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शनिवार की देर रात मोहल्ला अबुलमाली में आयोजित हुए मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध शायर डा. नवाज देवबंदी ने कलाम सुनाते हुए कहा..ये कितने सख्त हैं परवर दिगार के बंदे, वो कितना नरम है परवर दिगार होते हुए। युवा शायर वली वकास ने अपने जज्जाब कुछ यूं बयां किए.. यार बिछड़कर मुझसे आखिर इतना खुश तुम कैसे हो, सच बतलाओ सीने में तुम दिल रखते हो या पत्थर। अब्दुर्रहमान सैफ ने पढा... कर लिया था उजलत में जब तो फैसला लेकिन, मैं भी हाथ मलता हूं वो भी हाथ मलते हैं। शमीम किरतपुरी ने कुछ यूं कहा.. मेरा वजूद मिटाने से मिट नही सकता, मेरा वजूद तो बुनियाद है जमाने की। जुहैर अहमद ने कहा.. हमने देखी है खाक आसमानों में, आसमानों को खाक पर देखा। तारिक उस्मानी ने पढ़ा.. कैद में रहकर भी लड़ सकते हैं जालिम से, जंजीरों से शोर मचाया जा सकता है। जकी अंजुम ने पढ़ा.. कमाल देखिये धागे से कील काटता है, वे अपने झूठ से मेरी दलील काटता है। वसीम राज्जूपुरी ने कहा.. आप अफसुरदा मिजाजों पे बहुत हंसते है, आपने दिन ये गुजारे ही नही हैं सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इनके अलावा आतिफ रईस मुजफ्फरनगरी, उजैर अनवर शाह, डा. अदनान, मसरूर नाजिश, जहाज देवबंदी ने भी अपना कलाम सुनाया। संचालन अब्दुर्रहमान सैफ ने किया। इस मौके पर मास्टर कुंवर इकबाल, डा. सलीमउर्रहमान आदि मौजूद रहे।
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