नवाजुद्दीन से बात करते डॉ. संजीव बालियान।
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बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के रामलीला में अभिनय को लेकर बहस छिड़ गई है। नवाजुद्दीन खुद इससे आहत हैं, उनके प्रशंसकों में भी मायूसी है कि एक कलाकार की कला को मजहबी चश्मे से देखा गया। विरोध करने वाले अगर चंद लोग थे, तो बाकी आवाम को भी खामोश नहीं बैठना चाहिए। पुलिस प्रशासन हो या जनता, हर कोई चाहता है कि अभी भी देर नहीं हुई, नवाजुद्दीन को कसबे की रामलीला में अभिनय करना चाहिए।
चार दिन पहले की बात है रामलीला में रावण का अभिनय करने वाले विनीत कात्यान कुछ लोगों के साथ नवाजुद्दीन के घर रामलीला में आने का न्यौता लेकर पहुंचे थे, उन्हें यह कतई उम्मीद नहीं थी कि नवाजुद्दीन न सिर्फ आएंगे बल्कि मारीच का रोल करने के लिए भी तैयार हो जाएंगे, यह सब अचानक हुआ। चंद सेकेंडों में ही नवाज ने मारीच का रोल करने की इच्छा जता दी। नवाज का 20 साल पुराना सपना साकार होने वाला था।
बचपन में वह कसबे की रामलीला देखने जाते थे तो उनके अंदर का कलाकार कुलाचे भरता था। कई दफा रामलीला के स्टेज पर अभिनय के प्रयास किए, लेकिन मौका नहीं मिला। नवाज बड़े परदे पर किस्मत आजमाने मुंबई चले गए। कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं, कोई जान-पहचान नहीं। फिर भी हिम्मत नहीं हारी। सरफरोश में छोटा सा रोल मिला। उनका काम पसंद आया। पीपली लाइव के बाद नवाजुद्दीन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। बॉलीवुड में बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद भी रामलीला के अभिनय की कसक उनके अंदर थी। नवाजुद्दीन ने दो दिन तक कड़ी मेहनत की। रामलीला स्थल के पास स्कूल के कमरे में अन्य कलाकारों के साथ दिनभर रिहर्सल की।
मारीच के डायलॉग याद किए, लेकिन शाम होते-होते ऐसी परिस्थिति सामने आ गई जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। करीब दो घंटे पहले ही कार्यक्रम के विरोध की आवाज कानों तक सुनाई पड़ने लगी। शिवसेना के लोगों ने साफ कह दिया कि मुस्लिम कलाकार रामलीला में कैसे अभिनय कर सकता है। पुलिस के समक्ष भी विरोध प्रकट किया गया। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने भी कमेटी के लोगों को नफा-नुकसान समझाया। कुछ देर बाद कमेटी के लोगों ने नवाज से मिलकर कार्यक्रम निरस्त करने की इच्छा जताई। उस समय नवाज ने कहा था कि वह क्षेत्र में शांति चाहते हैं।
अगर उनके रोल से किसी को कोई परेशानी है तो वह अपना कार्यक्रम निरस्त करते हैं। कार्यक्रम के संयोजक विनीत कात्यान कहते हैं कि बात भले ही छोटी हो, लेकिन देशभर में इसका गलत संदेश गया है। नवाज की यह मायूसी कई सवाल छोड़ गई। सीधे शब्दों में कहें तो एक कलाकार की कला को धर्म के चश्मे से देखा गया है। नवाज के प्रशंसकों में इसको लेकर खासा रोष है। हिंदू-मुस्लिम सौहार्द के लिए जो संदेश जाना चाहिए था, वह नहीं जा सका। लोग अब खुलकर कह रहे हैं कि अभी भी देर नहीं हुई है। नवाजुद्दीन को जिले के लिए, यहां की अवाम के लिए रामलीला में अभिनय करना चाहिए।