जिले के लोग खुद ही हवा को जहरीली कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर प्लास्टिक कचरा कोल्हुओं में झोंका जा रहा है। खुलेआम इसका प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन कोई इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। यह स्थिति तब है, जब जिला वायु प्रदूषण के मामले बेहद खराब स्थिति में है। यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स ज्यादातर 200 से ऊपर रहता है।
एनजीटी ने प्लास्टिक या अन्य किसी भी प्रकार के कचरे को जलाने पर पाबंदी लगा रखी है। इसके बावजूद जनपद में खुलेआम प्लास्टिक कचरा बड़े पैमाने पर जलाया जा रहा है। जिले में करीब 2500 कोल्हू संचालित हैं। इनमें से बड़ी संख्या में कोल्हुओं पर प्लास्टिक कचरा जलाया जाता है। बिलासपुर से जौली होते हुए बेहड़ा सादात तक जाने वाली रोड के किनारे कई कोल्हू संचालित हैं। भोपा और मोरना क्षेत्र के अलावा प्रमुख सडक़ों से हटकर अंदर की ओर संचालित कोल्हुओं पर प्लास्टिक कचरे को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
खतरनाक स्तर पर रहता है जिले में प्रदूषण का स्तर
जिले में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर रहता है। अक्सर एयर क्वालिटी इंडेक्स 250 पर पहुंच जाता है जो बेहद खराब स्थिति होती है। वायुमंडल में हानिकारक गैसों की अधिकता के कारण इंडेक्स में इजाफा होता है। बीते दिनों हुई बारिश और हवा चलने के बावजूद रविवार को भी इंडेक्स 140 रहा। यह भी प्रदूषित स्थिति होती है।
पॉलिथीन के जलने से निकलती है विषैली गैस
पॉलिथिन कचरे के जलने से विषैली गैस निकलती है। पॉलिथीन जलने से कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड गैस निकलती हैं। यह सभी प्रदूषक गैसें हैं। इनका शरीर पर घातक असर पड़ता है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा. योगेंद्र त्रिखा बताते हैं कि इन सभी गैंसों से श्वांस एवं त्वचा से संबंधित रोग पैदा होते हैं। कार्बन मोनो ऑक्साइड शरीर में जाकर रक्त में आक्सीजन को कम कर देती है। इससे मृत्यु तक संभव है।
पॉलिथीन जलाने वालों पर होगी कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के मुताबिक पॉलिथिन या किसी भी प्रकार का कचरा जलाना प्रतिबंधित है। कोल्हुओं का निरीक्षण किया जाएगा। यदि पॉलिथीन जलाई जा रही है तो कार्रवाई की जाएगी - डीसी पांडेय, सहायक वैज्ञानिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।