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फोटोग्राफी पहले थी कला, अब चुटकी का काम

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अजय का खींचा गया फोटो जिसने प्रतियोगिता में प्राईज जीता था। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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फोटोग्राफी पहले थी कला, अब चुटकी का काम
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मुजफ्फरनगर। कहते हैं कि अगर किसी पल को अमर करना हो तो उसे तस्वीरों में कैद कर लो। चूंकि हम लम्हों को कैद नहीं कर सकते। मगर, ख्वाहिश होती है कि काश ये किसी किताब के पन्ने की तरह होते, जिन्हें जब चाहा उलट-पलट कर देख लेते। इंसानों की इन्हीं इच्छाओं को मूर्त रूप देने के लिए फोटोग्राफी की नई-नई तकनीकें सामने आई।
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समय के साथ फोटोग्राफी में काफी बदलाव हुआ है। पुराने समय में फोटोग्राफी एक आर्ट हुआ करती थी। फोटोग्राफर को एक सिंगल क्लिक में ही परफेक्ट आउटपुट देना होता था, मगर अब डिजिटल युग के कैमरों ने सभी को फोटोग्राफर बना दिया। पहले लकड़ी के बॉक्स वाले, हेजल ब्लेड कैमरे से फोटोग्राफी होती थी। उनसे ब्लैक एंड व्हाइट फोटो बनते थे। डिजिटल युग में सभी यादें फिल्म की जगह छोटी सी चिप में समा गई। जब हाईटेक कैमरे नहीं थे, तब भी तस्वीरें बनती थी। जब कैमरे का आविष्कार हुआ, तो फोटोग्राफी भी अपनी रचनात्मकता को प्रदर्शित करने का जरिया बन गया। आज फोटोग्राफरों के हुनर को पूरी दुनिया देख रही है। शहर के डीएवी इंटर कॉलेज के शिक्षक अजय को दस साल से फोटोग्राफी का शौक है। उन्होंने लेह, लद्दाख व उत्तराखंड के जंगलों में जाकर फोटोग्राफी की है। उनके द्वारा खींची गई तस्वीर प्रतियोगिता में प्राइज पा चुकी है। अजय कहते हैं कि आज डिजिटल युग में हर कोई फोटोग्राफर है, लेकिन फोटो खींचना एक कला है, जो हर किसी को नहीं आती। वहीं, शहर के उद्यमी अश्वनी खंडेलवाल 15 सालों से फोटोग्राफी कर रहे हैं। अश्वनी यूके, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड में जाकर भी फोटोग्राफी कर चुके हैं, हालांकि उन्हें भारत में लेह लद्दाख, हिमाचल और मुजफ्फरनगर में फोटोग्राफी करना पसंद हैं।
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