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पीएफआइ की जिले में पुरानी जड़े, सक्रिय सदस्यों को तलाश रही खुफिया नजरें

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- इस्लाम कासमी की गिरफ्तारी के बाद खुफिया तंत्र हुुआ सक्रिय
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- वर्ष 2019 में गिरफ्तार किए जा चुके है पीएफआई के चार सदस्य
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) की जड़े जिले में गहरी हैं। तीन साल पहले जिला पुलिस ने पीएफआई के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस्लाम कासमी की गिरफ्तारी के बाद इस बार पीएफआई की सक्रियता सामने आई हैं। इसी के मद्देनजर खुफिया तंत्र सक्रिय हुआ हैं।
टेरर फंडिंग को लेकर एनआईए और एटीएस ने संयुक्त अभियान चलाकर पीएफआई के सदस्यों पर शिकंजा कसा है। अलग अलग टीम ने शामली के कैराना और मुजफ्फरनगर के थाना फुगाना के गांव जोगियाखेड़ा में रहने वाले इस्लाम कासमी को एटीएस ने गिरफ्तार किया था। उसे और उसके तीन साथियों को मेरठ के खरखौदा थाने में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया।
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वर्ष 2019 में बीस दिसंबर को सीएए के विरोध में मेरठ रोड, मीनाक्षी चौक, मदीना चौक, महावीर चौक, आदि स्थानों पर जमकर हंगामा कर तोड़फोड़ व आगजनी की थी। शहर कोतवाली व सिविल लाइन थाने में तीस से अधिक मुकदमे दर्ज कर सैकड़ों लोगों को जेल भेजा था। इनमें नंगला रियावली निवासी इकबाल, तितावी के गांव जसोई निवासी फरमान, हुसैनाबाद निवासी नफीस व मुर्सलीन पीएफआइ के सदस्य शामिल रहे थे।
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