देवबंद। करीब दस हजार की आबादी वाले फुलास अकबरपुर में बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य विभाग की उपेक्षा का शिकार है। अस्पताल में इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां तक की अस्पताल का मुख्य द्वार और दीवार तक असामाजिक तत्वों ने तोड़ डाली है। अस्पताल में चारों तरफ सिर्फ घास ही नजर आती है।
देवबंद से करीब 12 किमी दूर स्थित फुलास अकबरपुर काली पार क्षेत्र में स्थित है। यहां बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दूधली, सांपला वक्काल, सांपला खत्री, फुलास, फुलासी, परोली, राजूपुर, गोपाली, तिघरी और थीतकी गांव जुड़े हैं। इन गांवों की जनसंख्या 18 हजार के आसपास बताई जा रही है। फुलास गांव के ग्रामीण हुसनैन, सदाकत, इरत्जा, कामिल, मूसा, डॉ. अजमल, अखलाक और हाजी जैद अहमद ने बताया कि पीएचसी सिर्फ की है। इलाज की यहां कोई व्यवस्था नहीं है, क्योंकि अस्पताल में दवाएं भी नहीं हैं। चिकित्सक के कभी कभार ही दर्शन होते हैं जो कुछ देर बैठकर चले जाते हैं। देखरेख नहीं होने के कारण अस्पताल के कमरों में बने फर्श व दीवार असामाजिक तत्वों ने खुर्द-बुर्द कर दी। अस्पताल परिसर में लंबी-लंबी घास खड़ी हुई है। कुल मिलाकर पीएचसी का ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इन सब समस्याओं के चलते ग्रामीणों को इलाज के लिए 12 किमी दूर देवबंद जाना पड़ता है।
इस संबंध में सपा के पूर्व जिला महामंत्री सिकंदर अली शासन प्रशासन को पत्र लिखकर अस्पताल में स्टाफ की तैनाती को सुनिश्चित बनाते हुए जरूरी दवाएं मुहैया करवाने की मांग कर चुके हैं। बावजूद इसके स्थिति जस की तस बनी हुई है। बता दें कि विगत दिन पूर्व विधायक एवं सपा नेता शशीबाला पुंडीर ने भी अस्पताल की स्थिति का जायजा लेकर पूरी स्थिति से सीएमओ को अवगत कराया था। वहीं, नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान हुसनैन ने बताया कि पीएचसी की दशा सुधारने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
फुलास पीएचसी में तैनात स्टाफ की कोविड में लगी ड्यूटी : डॉ. इंद्राज
देवबंद। क्षेत्र के गांव फुलास अकबरपुर में स्थित पीएचसी में डॉ. रियंका चौधरी के अलावा एक वार्ड ब्वाय, स्वीपर और फार्मेसिस्ट की तैनाती है, लेकिन वर्तमान समय में सभी कर्मचारियों की कोविड में ड्यूटी लगी हुई है। सभी पीएचसी में फुलास पीएचसी की स्थिति काफी खराब है, क्योंकि असामाजिक तत्वों ने पीएचसी की दीवार और मुख्य द्वार को क्षतिग्रस्त कर दिया है । इसके बाद भी अस्पताल में अभी तक कई बार वैक्सीनेशन कैंप लगाए जा चुके हैं, लेकिन लोगों में टीकाकरण को लेकर उत्साह कम है।