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संकट में मुजफ्फरनगर का पेपर उद्योग

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जिले में संकट में है पेपर उद्योग
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मुजफ्फरनगर। जिले के पेपर उद्योग पर संकट के बादल छा गए हैं। कच्चा माल नहीं मिलने से फैक्टरियों का चलना मुश्किल हो गया है। कच्चे माल के रूप में मिलने वाली रद्दी दस से 17 रुपये किलो पर पहुंच गई है। बाजार में कागज के रेट अधिक नहीं मिल पा रहे हैं, इस कारण हालात अधिक खराब हुए हैं।
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पेपर इंडस्ट्री में मुजफ्फरनगर का देश में पहला स्थान है। यहां 32 पेपर मिल है। देश की सबसे बड़ी पेपर मिले भी यहीं हैं। पेपर उद्योग से यहां हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। बीते कुछ दिन से यहां पेपर उद्योग पर संकट के बादल छाए हुए हैं। पेपर का कच्चा माल अब से पहले यहां अधिक मात्रा में विदेशों से आता रहा है। वर्तमान में ऐसे हालात बने हुए है कि बाहर से कच्चा माल आयात नहीं हो पा रहा है। पेपर इंडस्ट्री लोकल की रद्दी पर ही निर्भर है। कच्चे माल के रूप में जो रद्दी यहां 10 रुपये किलो मिल रही थी वह अचानक 17 रुपये किलो पर पहुंच गई है। इससे पेपर की लागत बढ़ गई है। लागत के हिसाब से बाजार में पेपर के दाम नहीं मिल पाने से फैक्टरियों के लिए पेपर उत्पादन घाटे का सौदा बन गया है। कच्चा माल महंगा और कम मिलने से कई फैक्टरी बंदी के कगार पर पहुंच गई है। पेपर इंडस्ट्री से जुड़े और आईआईए के चेयरमैन पंकज अग्रवाल का कहना है कि पेपर मिलों के सामने अचानक रद्दी की महंगाई और कच्चा माल भरपूर मात्रा में नहीं मिलने की समस्या खड़ी हो गई है। बाजार में कच्चे माल के हिसाब से तैयार माल के दाम नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में इंडस्ट्री को बंद करने के अलावा कोई विकल्प हम लोगों के पास दिखाई नहीं दे रहा है।
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