मंसूरपुर। भाकियू कार्यकर्ताओं ने एकमुश्त गन्ना भुगतान की मांग को लेकर बुधवार को मंसूरपुर डिस्टलरी पर ताला जड़ दिया। भाकियू नेता चंद्रपाल फौजी ने चेतावनी देते हुए कहा कि डिस्टलरी के अंदर न माल बाहर और न ही अंदर जाने दिया जाएगा। उधर, डिस्टलरी प्रबंधन ने इस कार्रवाई को जोर-जबरदस्ती करार दिया है। उनका कहना है कि किसानों के भुगतान से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
भाकियू के पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष चंद्रपाल फौजी के नेतृत्व में कार्यकर्ता एकत्र होकर बुधवार को मंसूरपुर डिस्टलरी पहुंचे। चंद्रपाल फौजी ने कार्यकर्ताओं के साथ डिस्टलरी के गेट पर ताला लगा दिया। चंद्रपाल फौजी ने कहा कि मिल मालिक किसानों के गन्ने का एकमुश्त भुगतान करें। किश्तों में किसान भुगतान नहीं लेंगे। गन्ने का समय पर भुगतान नहीं होने से किसान परेशान हैं। उनके बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
किसान कर्ज में डूबता जा रहा है और मिल मालिक मौज कर रहे हैं। शुगर मिल मालिक एवं अधिकारियों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक भाकियू डिस्टलरी के अंदर किसी भी तरह का माल अंदर और बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा।
इसके अलावा शुगर मिल के अंदर से चीनी व शीरे को भी बाहर नहीं निकलने देंगे। तालाबंदी करने वालों में भूपेंद्र प्रधान, संजीव राठी, राजीव तोमर, गौतम, करन बालियान, सुभाष, महिपाल, इमरान आदि कार्यकर्ता शामिल रहे। उधर, डिस्टलरी प्रबंधन ने इसे जोर-जबरदस्ती की कार्रवाई बताया है।
प्रबंधन का कहना है कि किसानों के भुगतान से डिस्टलरी का कोई लेना-देना नहीं है और न ही उनकी कोई शुगर मिल है, फिर भाकियू का इस तरह डिस्टलरी पर तालाबंदी करने का क्या औचित्य है। भाकियू के बड़े नेता इस बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।