मुजफ्फरनगर। लखनऊ की नाराजगी के बाद सरकारी कार्यालयों को बाहरी लोगों से मुक्त करने का अभियान कछुआ चाल से शुरू हुआ। सिटी मजिस्ट्रेट विकास कश्यप और सीओ नई मंडी रूपाली राव ने एआरटीओ में छापा मारा और मुख्य गेट बंद कराकर लोगों से जानकारी ली। हालांकि अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही यहां रोज नजर आने वाले बाहरी व्यक्ति चंपत हो गए और अधिकारियों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
एआरटीओ में बाहरी लोगों के काम करने की सूचना पर शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट व सीओ मंडी ने छापा मारा। दोनों ने पहले पूरे कार्यालय को देखा और बाद में कार्यालय का मुख्य गेट बंद करा दिया ताकि कोई भी बाहर न निकल सके। इसके बाद अधिकारियों ने कार्यालय में मौजूद लोगों से पूछताछ की। इस दौरान एआरटीओ अजय मिश्रा अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। बाद में आरआई नीतू शर्मा मौके पर पहुंचीं और दोनों अधिकारियों से बातचीत की।
अधिकारियों के आदेश पर वहां मौजूद लोगों के नाम व पते नोट किए गए। उनसे वहां आने का प्रयोजन भी पूछा गया। कार्यालय के कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। लगभग एक घंटे की कार्रवाई के बाद भी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं मिला। उधर, पूछताछ करने के बाद सभी व्यक्तियों को जाने दिया गया।
सुबह से ही अलर्ट थे बाहरी, गेट पर थी निगाह
एआरटीओ के बाहर दो दर्जन से अधिक एजेंट अपनी दुकान खोल कर बैठे हैं। अधिकारियों को वहां पहुंचा देख कर सभी एजेंट दुकान बंद कर चले गए। इसके अलावा एआरटीओ कार्यालय में काम करने और रोजाना नजर आने वाले बाहरी व्यक्ति सुबह से ही अलर्ट थे। जिले के अधिकारियों के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही थी। यही वजह है कि सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ को यहां कोई नहीं मिला।
डीएम के आदेश पर एआरटीओ में छापा मारा गया था। सूचना थी कि वहां बाहरी लोग कार्यालय में काम करते हैं। जांच पड़ताल में कोई बाहरी व्यक्ति काम करता हुआ नहीं मिला है। रूपाली राव, सीओ नई मंडी।
तहसील में काम करते मिले दोनों लोगों की जमानत मंजूर
खतौली। एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र सिंह के तहसील के औचक निरीक्षण करने के बाद लेखपालों के कार्यालय में दो बाहरी लोग पकड़े गए थे, जिन्हें अपर जिलाधिकारी ने थाने भिजवाया था। पुलिस ने दोनों का शांतिभंग करने की आशंका में चालान कर दिया था, जिनकी दूसरे दिन जमानत मंजूर कर ली गई। पुलिस ने गांव मढ़करीमपुर निवासी गौरव तथा गांव लाडपुर निवासी संदीप का शांतिभंग की आशंका में चालान कर दिया था। एसडीएम अपूर्वा यादव ने बताया कि पहले दिन दोनों लोगों की जमानत का कोई प्रार्थना पत्र नहीं मिला था। शुक्रवार को उनके अधिवक्ता की ओर से जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। जिस पर दोनों लोगों की जमानत को मंजूर कर लिया गया। संवाद