मुजफ्फरनगर। महासम्मेलन में कोलकाता से आए बेदाना ने कहा कि हमारे चेले बेटे से अधिक वफादार होते हैं। समाज में बेटा साथ छोड़ देता है, लेकिन हमारे यहां चेला साथ नहीं छोड़ता। गुरु का आदेश ही सर्वोपरि होता है। बेदाना ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के हैं। अपना पानी साथ लेकर चलते हैं। कितनी भी दूर हो चेला पानी लेकर उनके पास आ जाता है। हम चेला बहुत सोच समझकर बनाते हैं। हमारे समाज में भी कुछ गलत लोग है, जो शराब पीते हैं, गलत धंधे करते है, ऐसे को हम चेला नहीं बनाते।
बाप-बेटे से भी अच्छा संबंध यहां गुरु-चेले का है। हाजी नाजिम अपने गुरु की याद में ही यहां सबको भोजन करा रहे हैं। हमारी हंसी-खुशी समाज से ही है। समाज ही खाने-पीने और पहनने-ओढ़ने को देता है। हमें बुरा तब लगता है जब कोई अपने घर से हमें धक्का देता है। या कोई गलत व्यवहार करता है। हम सबके लिए दुआ करते हैं थोड़ा सा सम्मान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में यह बहुत ही बुरी बात है कि यदि किसी के परिवार में मंगलामुखी पैदा हो जाता है, तो उसके मां-बाप को भी ताने दिए जाते हैं, जबकि उनका कोई दोष नहीं है, हम जो भी है भगवान ने बनाए है। एक जमाने में घर छोड़ने के बाद दोबारा उधर जाते नहीं थे, दस-बारह साल से कुछ हालात बदले है, हमारे कुछ चेले अपने गरीब मां-बाप की सहायता भी कर देते हैं।
महासम्मेलन में पहुंचे देश भर के मंगलामुखी
मुजफ्फरनगर। अखिल भारतीय किन्नर महासम्मेलन का शुभारंभ पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान ने किया। सांसद संजीव बालियान ने माता के दरबार में माथा टेका और सभी मंगलामुखी ने उनके लिए दुआ की। नगर पालिका चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल, आयुष चिकित्सा बोर्ड के चेयरमैन डॉ सुभाषचंद शर्मा, अशोक अग्रवाल आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के आयोजक गुरु हाजी नाजिम ने बताया कि वह अपने गुरु की याद में यह महासम्मेलन करा रहे हैं। महामंडलेश्वर ज्योति मंगलामुखी अपने भक्ति के अंदाज में ही दिखाई दिए। गुरु मनीषा दिल्ली, सुनीता, बाला , पप्पी चरथावल, बेदाना कोलकाता, नरगिश बांग्लादेश, जयपुर की ख्वाहिश, कशिश, मुन्नी बाई, हिना आदि रहे।
समाज के ताने से तंग आए : ख्वाहिश
मुजफ्फरनगर। महासम्मेलन में आए जयपुर की ख्वाहिश ने कहा कि उसका सपना अच्छी ब्यूटीशियन का था, मेरे गुरु ने मुझे कोर्स कराया। इंटरव्यू में मेरा काम देखकर मुझे नौकरी पर रख लिया, लेकिन समाज के ताने से तंग आकर मुझे यह छोड़ना पड़ा।
मंगलामुखी को लेकर हमारे समाज की सोच ठीक नहीं है। इसी का शिकार जयपुर की ख्वाहिश को होना पड़ रहा है। कक्षा दस के बाद ही मंगलामुखी की दुनिया में आ गया। इससे पहले तीन भाई बहनों में वह खुश थे, मॉ-बाप उसे बहुत प्यार करते थे। अचानक इधर आने पर उसे शुरू में दुख हुआ, लेकिन गुरु मुन्नी बाई ने इतना प्यार दिया कि सब भूल गए। उनके गुरु बहुत अच्छे हैं।