मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल की दवाइयों की खरीद में वर्ष 2000 में हुई घपलेबाजी की परतें विजिलेंस ने खोल दी हैं। छानबीन के बाद तत्कालीन दो पूर्व सीएमएस, डॉक्टर और स्टोर इंचार्ज समेत दवाई सप्लाई करने वाली मेरठ की कंपनी के प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें मोटी रकम हजम करने का आरोप भी लगाया गया है। आरोपी डॉक्टर फिलहाल रिटायर हो चुके हैं।
करीब एक साल पहले जिला अस्पताल में दवाईयों की खरीद-फरोख्त में मोटी रकम का हेरफेर करने की शिकायत शासन से की गई थी। इसमें आरोपियों के तार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जुड़े बताए गए थे। मामले की गंभीरता पर जांच विजिलेंस को सौंपी गई थी। छानबीन के दौरान विजिलेंस ने पाया गया कि 19 सितंबर 1999 से 21 मार्च वर्ष 2000 तक डिप फॉर्मास्यूटिकल दवाई कंपनी से जिला अस्पताल के लिए दवाईयां खरीदीं गईं।
इसमें अस्पताल की तरफ से 26 डिमांड लेटर कंपनी को भेजे गए। 26 बिल पेमेंट किए गए। कंपनी को कुल 3 लाख 65 हजार 556 रुपये का भुगतान किया गया था। जबकि दवाईयों की कीमत इससे बेहद कम थी। इसमें भारी अनियमितताओं के साथ हेरफेर करते हुए सरकारी धन हजम कर लिया गया। सोमवार को उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, मेरठ के निरीक्षक अजय सिंह की तरफ से शहर कोतवाली में सभी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
तत्कालीन सीएमएस डॉ. मोहनलाल वर्मा, कानपुर के कृष्णापुरम निवासी डॉ. जगमोहन लाल, इंदौर निवासी स्टोर इंचार्ज प्रकाश चंद के अलावा डिप कंपनी के प्रबंधक राकेश गुप्ता निवासी पल्लवपुरम, फेस वन, मेरठ के खिलाफ दवाईयों के धन में घोटाला करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। उधर, शहर कोतवाल चमन सिंह चावड़ा का कहना है कि विजिलेंस की तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया है। अभी विजिलेंस छानबीन करेगी। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई होगी। सीएमओ डॉ सुबोध कुमार का कहना है कि यह मामला उनके कार्यकाल से काफी दिन पहले का है। इस मामले की जानकारी नहीं है। मुकदमा दर्ज कराने के बारे में भी जानकारी नहीं है।