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नोटबंदी : बाजार के हालात सामान्य होने में लगा एक साल

Wed, 08 Nov 2017 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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एटीएम से रुपये निकालने के लिए लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
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आज वही तारीख है, जब पूरे देश में नोटबंदी का एलान किया गया था। केंद्र सरकार ने 1000 और 500 रुपये के नोट बंद कर दिए थे। काम-धंधा छोड़कर व्यापारी, आम आदमी के साथ मास्टर, डॉक्टर नोट बदलने के लिए लाइन में खड़े हो गए। नोटबंदी के बाद पलभर में हाहाकार मच गया। नोटबंदी की मार से चौपट हुए व्यापार को पटरी पर लाने की कवायद में जुटे व्यापारी कहते हैं कि केंद्र सरकार के कई निर्णयों ने बोझ बढ़ाया है। हालांकि अब हालात सामान्य होने लगे हैं। 
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केंद्र की मोदी सरकार ने आठ नवंबर 2016 की रात 1000 और 500 रुपये के पुराने नोट बंद कर दिए थे। नोट बदलने के लिए भी सीमा निर्धारित की गई, जिसके चलते करीब दो माह तक बैंकों और एटीएम के बाहर से लाइन नहीं टूट सकी। आम से खास तक को नोटबंदी ने दर्द दिया। नोटबंदी के बाद बाजार में कारोबार की चाल भी सुस्त पड़ गई। छह माह तक व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया। व्यापारियों के साथ आम आदमी की दैनिक क्रियाएं भी बदल गईं।

बेपटरी हुए व्यापार को पिछले एक साल से कारोबारी पटरी पर लाने की कवायद में जुटे थे कि अब जीएसटी की मार पड़ गई। एक साल बाद बाजार के हालात सामान्य हो रहे हैं। कपड़ा व्यापारी हर्षवर्धन जैन ने कहा कि नोटबंदी का असर कालाधन रखने वालों पर अधिक पड़ा। व्यापार पर प्रभाव पड़ा, जिसे सामान्य होने में वक्त लगा। हालांकि अब व्यवस्था पटरी पर है। सरकार का फैसला बड़ा था, जिससे हर वर्ग प्रभावित हुआ। 
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कारोबारी अरविंद कुमार ने कहा कि नोटबंदी से व्यापार पूरी चौपट हुआ है, जो अभी तक पटरी पर नहीं आ सका है। सीजन में भी कारोबारी खाली बैठा है। धीरे-धीरे हालात बदले. जिसका खामियाजा भी व्यापारियों को ही उठाना पड़ा है। दुकानदार सतीश कहते हैं कि नोटबंदी में कारोबार छोड़कर महीनों तक बैंकों के चक्कर लगाने पड़े थे, अभी तक स्थिति नियंत्रण में नहीं है।

पैसे के लेनदेन की सीमा भी निर्धारित की गई है, जो व्यापार हित में नहीं है। छोटे-मोटे सभी कारोबारियों को परेशानी हुई। रेडीमेड कपड़ा व्यापारी आनंद कुमार ने कहा कि शुरुआत में परेशानियां आईं। कारोबार, घर का खर्च समेत अन्य उपभोग में दिक्कत हुई। एक साल बीतने पर स्थिति पटरी पर लौटी है। 

निकाय चुनाव में छाया नोटबंदी मुद्दा 
मुजफ्फरनगर। निकाय चुनाव में नोटबंदी का मुद्दा छा गया है। नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर पुरानी वीडियो वॉयरल कर वोटरों को चेताया जा रहा है, जिसमें बैंकों के बाहर लगी लाइन और पुलिस के लाठीचार्ज करने को दिखाकर लोगों को नोटबंदी पर दुख जताया जा रहा है। इसे निकाय चुनाव में भी विपक्षी पार्टी अहम मुद्दा बना रही हैं। 

एटीएम के हालात जस के तस 
मुजफ्फरनगर। नोटबंदी के बाद खाली हुए एटीएम के हालात भी जस के तस हैं। शहर के अधिकांश एटीएम खाली पड़े हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से पर्याप्त रूप में लीड बैंक को पैसा नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते एटीएम में कम मात्रा में कैश रखा जा रहा है। कई एटीएम के कपाट ही बंद पड़े हुए हैं।

नोटबंदी में बैंकों में 900 करोड़ रुपये हुए जमा 
आठ नवंबर 2016 वह तारीख है, जिसमें नोटबंदी की घोषणा और दो माह में काला धन बाहर लाने की हुंकार भरी गई। इसके बाद नौ नवंबर से जेब, तिजोरी खाली और बैंकों के लॉकर भरने शुरू हो गए। नोटबंदी में जिले में बड़े पैमाने पर निष्क्रिय खाते सक्रिय हुए। उपभोक्ताओं के बैंक खातों में हलचल रही।

जिससे बैंकों के लॉकरों में पैसा रखने की जगह नहीं बची। जनपद में नोटबंदी के दौरान 900 करोड़ रुपये से अधिक जमा कराए गए। इतनी बड़ी रकम बैंकों में पहुंचने के बाद भी कालेधन पर तस्वीर साफ नहीं हो सकी। कालेधन के शिकारियों पर नकेल डालने में आयकर विभाग भी पीछे रहा है। 

मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद बैंकों में पुराने (1000-500) के नोट जमा कराने के लिए महीनों तक लाइन नहीं टूटी थी। बैंक खुलने से पहले नागरिकों की लाइन बैंकों के बाहर लग जाती थी। एक बदले जाने की सीमा भी निर्धारित रही। इससे हालात अधिक बिगड़े थे। बैंकों के बाहर व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को भी कमान संभालनी पड़ी। जिले की सभी बैंक शाखाओं में करीब 900 करोड़ रुपये से अधिक जमा कराए गए।

इसमें से 20 फीसदी राशि उन खातों में जमा की गई, जो कई-कई माह से निष्क्रिय थे। नोटबंदी के बाद सक्रिय हुए। इन खातों में पैसा जमा कराया गया। हालांकि नोटबंदी के बाद कालेधन को लेकर आयकर विभाग की कार्रवाई भी सुस्त रही है। बैंकों से डिटेल मांगी गई, बड़े खातों का रिकार्ड भी खंगाला गया। कुल मिलाकर जिले में कालेधन की तस्वीर साफ नहीं हो सकी है।

आयकर विभाग ने भी कार्रवाई के लिए कपड़ा मार्केट, चिकित्सकों के क्लीनिक, हॉस्पिटल पर कार्रवाई की गई। लीड बैंक मैनेजर एसके जैन ने बताया कि नोटबंदी के बाद जिले में आरबीआई द्वारा पर्याप्त रूप से करेंसी नहीं भेजी गई। नोटबंदी के दौरान अनुमानित तौर पर करीब 900 करोड़ रुपये जमा कराए गए, जिन खातों पर संदेह हुआ है। उनकी जानकारी हैडऑफिस भेजी गई। वहीं से आयकर विभाग को सूचना फ्लैश की गई। 

200 और 50 का नोट कम पहुंचा 
मुजफ्फरनगर। भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 200 और 50 रुपये का नया नोट जारी किया है। मगर नोट जिले में कम ही मात्रा में पहुंचा है, जबकि 2000 और 500 के नोट की पूर्ति भी जिले में कम है। जिसके चलते अधिकांश एटीएम बिना कैश के चल रहे हैं। दिखावे के लिए मशीन चालू है, लेकिन कैश देने के नाम पर शून्य है। 

सिक्कों से भरा गल्ला, कहां जमा कराएं 
मुजफ्फरनगर। छोटे-बड़े व्यापारी के पास सिक्कों की भरमार है। दिनभर में सिक्के दुकानदारों के पास खूब पहुंच रहे हैं। इनमें बैंक केवल 10 रुपये का सिक्का लेता है, वो भी एक हजार रुपये। अन्य पांच, एक और दो रुपये के सिक्कों से व्यापारियों का गल्ला भरा है। जिसे व्यापारी के साथ बैंक भी लेने से हाथ खड़े कर रहे हैं।  
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